चम्बा: बीओ ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर किया गबन, पांच के खिलाफ केस दर्ज

स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने चंबा जिले में तैनात रहे एक रेंज अफसर, एक ब्लॉक (बीओ) अफसर और दो फॉरेस्ट गार्ड समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ करीब साढ़े चार लाख रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में एफआईआर दर्ज की है।

आरोप है कि बीओ ने रेंज अफसर और फॉरेस्ट गार्डों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कर सड़क निर्माण के लिए आई राशि में से बड़ा हिस्सा हड़प लिया। मामले की शिकायत चंबा के ही एक ठेकेदार ने की थी, जिसने उक्त सड़क का निर्माण किया था।

शिकायतकर्ता कमल किशोर के अनुसार साल 2017 में वन विभाग ने अपर रेंज चंबा के अपर ध्रेडी फॉरेस्ट ब्लॉक के बकाणी बीट में जीप योग्य रोड समोट से बनगोटू वाया काली नाली तक निर्माण कराने के लिए एस्टीमेट तैयार कराया। ठेकेदार का कहना था कि कागजी कार्रवाई पूरी होने से पहले ही डीएफओ चंबा और अन्य के कहने पर जेसीबी लगाकर रोड का निर्माण कर दिया, लेकिन जब उसने काम का पैसा मांगा तो डीएफओ चंबा ने आरओ अपर रेंज ध्रेडी को इस कार्य की पैमाइश के लिए भेज दिया। आरओ ने कार्य की पैमाइश की और कहा कि यह कार्य ज्यादा हो चुका है, इसलिए इसका टेंडर लगाना पड़ेगा।

इसके बाद बीओ ने ठेकेदार को फोन कर तीन भरोसेमंद व्यक्तियों के नाम देने को कहा, ताकि उनके नाम से बिल लगाकर राशि जारी की जा सके। कमल ने परिचित सुभाष चंद्र और अनिल कुमार का नाम दे दिया, जिसपर 4 लाख 98 हजार की पेमेंट इन तीनों के खातों में डाल दी गई, लेकिन बाकी राशि अपने परिचितों को बांट दी। विजिलेंस ने जब शिकायत की जांच की तो पता चला कि इस रोड के निर्माण के लिए डीएफओ कार्यालय चंबा ने 19.69 लाख का एस्टीमेट तैयार किया था, लेकिन बाद में निर्माण के लिए केवल 7.55 लाख रुपये ही रखे थे।

जांच में पता चला कि बीट फोरेस्ट गार्ड हितेश्वर सिंह व सचिन, बीओ सूरम सिंह, रेंज अफसर ओंकार सिंह और अन्य व्यक्ति रमेश कुमार ने मिलीभगत करके 2.36 लाख की सरकारी धनराशि के जाली भुगतान बिल बनाए और बीओ ने सरकारी दस्तावेजों में 2.22 लाख की राशि के कार्य अधिक दर्शा दिए। विजिलेंस ने जब पीडब्ल्यूडी से इस रूट का एसेसमेंट करवाया तो रोड निर्माण में हुए काम की असेसमेंट वैल्यू 2.22 लाख रुपये कम निकली। जांच में साबित हुआ कि हितेश्वर व सचिन, बीओ व आरओ के अलावा एक अन्य व्यक्ति रमेश कुमार ने साजिश के तहत कुल 4.59 लाख के सरकारी धन का गबन कर लिया। साथ ही यह भी पुष्ट हुआ कि किए गए निर्माण कार्य का भुगतान शिकायतकर्ता को नहीं किया गया।

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