बद्दी में बनेगी ब्लैक फंगस की दवाई, हिमाचल में अब तक आए चार मामले

कोरोना संकट से जूझ रहे हिमाचल को अब नई महामारी ब्लैक फंगस भी बुरी तरह से डराने लगी है। हमीरपुर और अर्की के बाद शनिवार को टांडा मेडिकल कालेज में ब्लैक फंगस के दो मामले सामने आने से हड़कंप मच गया है। ब्लैक फंगस ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना से जूझ रहे लोगों के सामने अब और अधिक बचाव करने संकट है। महामारियों के इस दौर में अपने आप को कैसे बचाया जाना है, यह अब सबके सामने बड़ी चुनौती है।

टांडा में सामने आए दो मामलों में एक महिला व एक पुरुष है। दो लोकल ही बताए जा रहे हैं। ब्लैक फंगस के दो नए केस टांडा मेडिकल कालेज में सामने आए हैं।

दो ही मरीज कोरोना से संक्रमित है और इन मरीजों में ही ब्लैक फंगस के लक्षण पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गाइडलाइन के मुताबिक उनका उपचार शुरू कर दिया है, लेकिन एक साथ दो महामारियों से जूझना सरकार प्रशासन व स्वास्थ्य महकमें के लिए भी आसान नहीं होगा। उधर, उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति का कहना है कि सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है और प्रशासन भी स्वास्थ्य महकमे से मिलकर मरीजों को सुविधाएं देने के लिए विशेष योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि संकट के समय में लोग घबराएं नहीं हौसला रखें। सरकार व प्रशासन लगातार प्रयास कर रहे हैं। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. गुरदर्शन गुप्ता ने टांडा में ब्लैक फंगस के दो नए मामले आने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एक महिला और एक पुरुष जो स्थानीय निवासी हैं, वह ब्लैंक फंगस से संक्रमित हुए हैं। उनका इलाज मेडिकल कालेज में चल रहा है।

एक आपरेशन सफल, दूसरी महिला को करना होगा इंतजार

आईजीएमसी में ब्लैक फंगस का दूसरा मामला सामने आया है। अर्की की रहने वाली 41 वर्षीय महिला को शुक्रवार देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके लिए टेस्ट में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। शनिवार को डाक्टरों की टीम ने महिला का आपरेशन किया, जो कि सफल रहा। अब महिला की हालत स्थिर है। गौरतलब है कि गुरुवार को भी हमीरपुर जिला की रहने वाली 53 साल की महिला में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई थी। महिला की शुगर ज्यादा होने के कारण उनका शनिवार को आपरेशन नहीं किया गया।

उधर, शनिवार को जिस महिला का आपरेशन हुआ है वह महिला कोरोना संक्रमित थी और स्वस्थ होने के बाद घर पर ही थी। महिला शुगर और बीपी की भी मरीज है। डाक्टरों का कहना है कि महिला की हालत अब स्थिर है। ऐसे में जल्द ही ठीक होकर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि गुरुवार को भी हमीरपुर जिला की रहने वाली 53 साल की महिला में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई थी। महिला की शुगर ज्यादा होने के कारण उनका शनिवार को आपरेशन नहीं किया गया। जब शुगर लेवल कम हो जाएगा, तो उसके बाद आपरेशन कर दिया जाएगा। उधर, आईजीएमसी के एमएस डा. जनकराज ने बताया कि इसकी पुष्टि की है।

तीन कंपनियों के पास एम्फोटेरिसिन-बी के निर्माण का लाइसेंस

ब्लैक फंगस के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवा एम्फोटेरिसिन-बी का जल्द ही हिमाचल के दवा उद्योगों में भी उत्पादन शुरू हो जाएगा। मौजूदा समय में बद्दी की तीन फार्मा कंपनियों के पास एम्फोटेरिसिन-बी के निर्माण का लाइसेंस है। यह कंपनियां सामान्य हालातों में मांग कम होने की वजह से इस दवा का सीमित उत्पादन करती है, लेकिन अब मांग बढ़ते ही फार्मा कंपनियों ने भी उत्पादन बढ़ाने के लिए कदमताल तेज कर दी है। एक कंपनी ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इसी सप्ताह प्रदेश दवा नियंत्रक से इस दवा लाइसेंस हासिल किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तेजी के साथ एंटी-फंगल दवा एम्फोटेरिसिन-बी की डिमांड बढ़ रही है,उक्त कंपनियां जल्द ही इस दवा का उत्पादन शुरू कर देंगी। बतातें चलें कि हिमाचल की फार्मा कंपनियां जिस तरह से कोरोना के कहर से जूझ रहे देश दुनिया को राहत दिलाने के लिए कोरोना के उपचार में इस्तेमाल की जा रही दवाओं के उत्पादन में दिन रात जुटी है, उसी तरह ब्लैक फंगस के उपचार की दवा के उत्पादन के लिए एकशन मोड पर आ गई है, हालांकि दवा निर्माता कंपनियों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती सबंधित दवा के रॉ मटीरियल की उपलब्धता का है, दरअसल एम्फोटेरिसिन-बी का कोटिंग मटीरियल आयात किया जाता है और इसकी खासी किल्लत चल रही है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक एंटी फंगल दवाओं के नए स्टॉक को मार्केट में पहुंचने में 15 से 30 दिन का समय लगेगा, क्योंकि इस दवा का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें कई दिन का समय लगता है।

उनके अनुसार यह इंजेक्शन का उत्पादन लिपोसोमल प्रौद्योगिकी के जरिए किया जाता है, इस उत्पादन चक्र करीबन तीस दिनों का है, इसमें स्टर्लिटी परीक्षण करने की आवश्यकता होती है और उसके बाद ही तैयार माल को वितरण के लिए भेजा जा सकता है। हिमाचल में सिर्फ बद्दी में तीन फार्मा कंपनियों हैल्थ बायोटेक, यूनाइटेड बायोटेक व समर्थ लाइसेंस के पास इस दवा के निर्माण का लाइसेंस है, उक्त कंपनियां सामान्य स्थितियों में एंटी फंगल दवा लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी की मांग बेहद कम होने की वजह से दवा का निर्माण सीमित मात्रा में ही करती है, ज्यादातर इस दवा का निर्यात ही किया जा रहा था, लेकिन देश में ब्लैक फंगस के मामलों में अचानक हुई बढ़ोतरी के उपरांत फार्मा हब बद्दी की फार्मा कंपनियां भी अलर्ट हो गई है। उधर, राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने पुष्टि करते हुए बताया कि बददी की तीन फार्मा कंपनियों के पास लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी के निर्माण का लाइसेंस है, उक्त कंपनियां सीमित मात्रा में इस दवा का उत्पादन कर रही थी, लेकिन अब मांग बढ़ने पर कंपनियां उत्पादन बढ़ाने में जुट गई है।

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