भारतीय मजदूर संघ का राजधानी शिमला में हल्ला बोल, प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हुई झड़प

शिमला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजधानी शिमला में भारतीय मजदूर संघ (Indian Labor Union) ने सोमवार को हल्ला बोला. मजदूरों, विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की मांगो और निजीकरण के विरोध में मजदूर संघ ने चौड़ा मैदान से राज्य सचिवालय तक विशाल रैली निकाली, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए.

जैसे ही प्रदर्शनकारी सचिवालय पहुंचे तो पुलिस ने मुख्य सड़क पर बने गेट को बंद कर दिया. इससे प्रदर्शनकारी भड़क गए और कुछ प्रदर्शनकारी (Demonstrators) गेट के उपर चढ़ गए. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प हुई. जो लोग गेट पर चढ़े हुए थे उनको नीचे उतारने के लिए पुलिस ने डंडो का इस्तेमाल किया.

वहीं, इस दौरान एक महिला को मामूली चोटें आईं. काफी देर तक ये हंगामा चलता रहा. प्रदर्शनकारियों ने जय राम सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. खासकर महिलाओं ने जमकर गुस्साा निकाला. दो महिलाएं रोती हुई भी नजर आईं. साथ ही एक महिला प्रदर्शन स्थल पर बेहोश गई. उसे तुरंत उपचार से ले जाया गया. कुछ देर तक माहौल खासा तनावपूर्ण हो गया. पुलिस ने मुख्य सड़क को बंद कर दिया. वाहनों और पैदल चलने वालों को वैक्लपिक मार्ग से भेजा गया. वहीं, प्रदर्शनकारी सचिवालय के पास स्थित छोटा शिमला थाने के बाहर कई घंटो तक डेरा जमाए बैठे रहे.

मजदूर समेत अन्य कर्मी भारी संख्या में शामिल हुए

चौड़ा मैदान से सचिवालय तक रैली के दौरान शिमला शहर जाम हो गया. घंटो तक सड़क पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें नजर आईं. हाईकोर्ट के समीप पुलिस ने रोका तो प्रदर्शनकारियों ने कुछ देर तक लिफ्ट के सामने चक्का जाम कर दिया. कार्ट रोड पर बैठकर प्रदर्शन किया. इससे पहले सुबह करीब 10 सभी प्रदर्शनकारी चौड़ा मैदान में इक्ठ्ठा हुए और एक सभा की गई. प्रदर्शनाकारियों में आंगनबाड़ी, आशा वर्कर, मिड डे मील कर्मी, विभागों में तैनात दैनिक भोगी, असंगठित क्षेत्र के मजदूर समेत अन्य कर्मी भारी संख्या में शामिल हुए.

संघ की मांगों की सूची काफी लंबी है

भारतीय मजदूर संघ की मुख्य मांगो में दैनिक भोगियों, सभी सरकारी और अर्ध सरकारी, स्कीम वर्कर, मनरेगा, निजी उद्योगों और असंगठित क्षेत्र में कार्यरत दैनिक भोगी कामगारों को 18 हजार रू. प्रति माह वेतन की मांग की गई. सभी सरकारी कर्मचारियों को 7वें वेतनमान को लागू करने की मांग के अलावा, सरकारी और निजी क्षेत्र के उद्योगों में ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की मांग की गई. साथ ही आंगनबाड़ी, आशा वर्कर , मिड डे मील वर्करों के लिए स्थाई नीति के निर्माण की मांग करने के साथ- साथ सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की गई. संघ की मांगों की सूची काफी लंबी है.

एक महिला कर्मचारी को लाठी मारी गई

भारतीय मजदूर संघ के उत्तरी क्षेत्र के संगठन मंत्री पवन कुमार ने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी कि मजदूरों से टकराएंगे तो अंजाम बुरा होगा. साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री को मांगो के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा जाएगा. मांगें नहीं मानी गईं तो फिर संघ बड़े आंदोलन की रणनीति बनाएगा. उन्होंने कहा कि पुलिस ने बल प्रयोग किया और एक महिला कर्मचारी को लाठी मारी गई.

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