कुल्लू थप्पड़ कांड में एएसपी बृजेश सूद को मिल सकता है क्लीन चिट, दोबारा हो सकती है तैनाती

Himachal News: कुल्लू थप्पड़ व लात प्रकरण को तूल देने की बजाय सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार एएसपी रैंक के अधिकारी बृजेश सूद को जांच रिपोर्ट और घटना के दौरान बरते धैर्य के कारण क्लीन चिट सकती है। सूद को दोबारा मुख्यमंत्री सुरक्षा का प्रभारी बनाए जाने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। अगर उन्होंने भी कुल्लू के तत्कालीन एसपी गौरव सिंह को रिएक्शन के तौर पर मारपीट की होती तो उन्हेंं भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते। थप्पड़ खाने के बावजूद वह खामोश रहे, इसके चलते उन पर कार्रवाई का बड़ा ग्राउंड तैयार नहीं हो पाया। सरकार का एक पक्ष तो आइपीएस अफसर गौरव सिंह को भी बहाल करने के पक्ष में हैं।

इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि उनका सेवाकाल काफी लंबा है, वह डीजीपी के ओहेद तक पहुंचने तय है, अगर अभी कोई दाग लग गया और विभागीय जांच से गुजरे तो और विवादित होंगे। ऐसे में सरकार उन्हेंं भी चेतावनी देकर छोडऩे का विचार कर रही है। मुख्यमंत्री के पीएसओ रहे बलवंत का पुराना सेवाकाल अच्छा रहा है। वह विधायक से लेकर मुख्यमंत्री की संस्था के प्रति वफादार रहे हैं। लेकिन, उन्हेंं हालिया प्रकरण में सभी दोषी की तरह देख रहे हैं। सरकार चाहे तो उन्हेंं भी चेतावनी देकर छोड़ सकती है, लेकिन इसके आसार काफी कम हैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच खोलने के अलावा चार्जशीट जैसी कार्रवाई हो सकती है। इस मामले को सरकार मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह के साथ भी चर्चा कर रही है।

विभागीय जांच में क्या होगा

विभागीय जांच में अगर कोई भी दोषी पाया गया तो मेजर, माइनर पेनल्टी हो सकती है। मेजर पेनल्टी में नौकरी से बर्खास्त करने, सेवाकाल कम करने जैसा सख्त कदम तक का प्रविधान है, जबकि माइनर पेनेल्टी में इंक्रीमेंट रोकने व चेतावनी देने जैसी सजा का प्रविधान है।

मामला एचपीपीएस बनाम आइपीएस

सरकार कड़ी कार्रवाई से पीछे हट़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कार्रवाई की तो मुद्दा हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा बनाम भारतीय पुलिस सेवाओं के बीच हो जाएगा। दोनों तरह की सेवाओं से जुड़े अधिकारियों के बीच और विवाद बढऩे के आसार होंगे। अगर सरकार ने पहले ही कड़ी कारवाई करनी होती तो आपराधिक मामला दर्ज करवाया जा सकता था। फिलहाल सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हुई है कि क्या एक्शन लेती है।

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