हॉस्पिटल की एम्बुलेंस के टायर पंचर हो जाए, कौन करेगा मुरम्मत

हिमाचल में सरकार लॉकडाउन लगाकर आम लोगों की जिंदगीयां बचाने की कोशिश कर रही है। लेकिन कई मामलों में सर्विस की अनदेखी भी की गई है। यह सही है कि लॉकडाउन लगाने से कोरोना की चेन टूटेगी और हजारों जिंदगी आ बच जाएगी। लेकिन उनका क्या जो कोरोना से संक्रमित हो कर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे है। क्या सरकार ने उन लोगों की जिंदगी के बारे कुछ सोचा है। अगर हां तो फिर सरकार ने टायर पंचर मैकेनिकल और गाड़ियों के काम करने वाली दुकानें क्यों बंद रखी हैं।

ताजा मामला हमारे सामने शिमला के दिल्ली से निकल कर सामने आया है। जहां एक व्यक्ति टायर पंचर की दुकान करता है और उस व्यक्ति का कहना है कि मेरी दुकान पर एंबुलेंस और दूसरी गाड़ियों के टायरों में पंचर लगाए जाते हैं तथा उनकी मरम्मत भी की जाती है। आज लॉक डाउन की वजह से मेरी दुकान बंद है। अगर स्थिति में किसी एंबुलेंस का टायर हो जाता है। तो उसको कौन ठीक करेगा।

जानकारी के मुताबिक उक्त व्यक्ति की बात एकदम सही है। शिमला में दिल्ली सब्जी मंडी के पास स्थित इस दुकान में आसपास के सभी हॉस्पिटल की एंबुलेंस के टायर चेक किए जाते हैं और लगभग सभी स्थानीय एंबुलेंस के पंचर भी इसी दुकान पर लगाए जाते हैं।

प्रशासन और सरकार द्वारा इस तरह बिना सोचे समझे लगाए लॉकडाउन से आम आदमी का भला नहीं हो सकता। बल्कि सरकार और प्रशासन में बैठे अधिकारियों को एक बार इसके बारे में जरूर सोचना चाहिए था कि जरूरी सर्विस देने वाली दुकानों को खुला रखना चाहिए। अगर शिमला में ढाबे, चाय की दुकान और होटल खुले हो सकते हैं तो एक टायर पंचर की दुकान क्यों नहीं यह सवाल अपने आप में बेहद चिंतनीय और गंभीर है।

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