उपचुनाव में हार के बाद गुजरात और उत्तराखंड की भांति हिमाचल में परिवर्तन की सुगबुगाहट शुरू

Himachal CM Jairam Thakur, हिमाचल प्रदेश उपचुनाव में भाजपा के 4-0 से प‍िछड़ने के बाद राज्‍य में दबे स्वरों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं यहां भी उत्तराखंड और गुजरात की पुनरावृत्ति न हो जाए।

नेतृत्‍व परिवर्तन की नई चर्चा छिड़ गई है। कुछ नेता तो यह अनुमान लगा रहे हैं कि आलाकमान जल्द ही प्रदेश के नेतृत्व को दिल्ली तलब कर सकता है। खास तौर पर मंडी संसदीय सीट पर हार के बाद यह कयासबाजी तेज हो गई है। मंडी संसदीय सीट पर भाजपा के प्रत्‍याशी को हार का सामना करना पड़ा है, जबकि 2019 में इसी सीट पर पार्टी के रामस्‍वरूप शर्मा ने चार लाख से ज्‍यादा वोट से जीत दर्ज की थी। डेढ़ साल के बाद ही भाजपा की यह विजयी लीड हार में बदल गई।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने महंगाई और नेताओं का सहयोग न मिलने की बात कही है। लेकिन कहीं न कहीं संदेश यही गया कि वह अपने गृह क्षेत्र मंडी में राजनीतिक पकड़ में कमी रही। मंडी के तहत आने वाले दो विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित कैबिनेट मंत्री बढ़त दिलाना तो दूर अपनी लाज भी नहीं बचा पाए। अगले वर्ष 2022 में विधानसभा के चुनाव होने हैं और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितयों में विधानसभा चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।

चर्चा है कि भाजपा मुख्यालय हिमाचल पर निर्णय ले सकता है, ताकि सरकार विरोधी लहर को काबू में लाया जा सके। उत्तराखंड और गुजरात में भाजपा नेतृत्व परिवर्तन कर चुका है। ऐसे में आशंका है कि प्रदेश भाजपा के मौजूदा मंत्रियों में से किसी साफ सुथरी छवि वाले को मुख्यमंत्री पद का दायित्व सौंपा जा सकता है। उपचुनाव में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह विधानसभा क्षेत्र भी भाजपा को अपेक्षाकृत बढ़त नहीं दिला पाया।

वीरेंद्र कंवर का नाम चर्चा में

प्रदेश सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर का नाम चर्चा में है। वीरेंद्र कंवर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खास रहे हैं और उन्होंने विधानसभा चुनाव में धूमल के लिए अपनी सीट छोड़ने का सार्वजनिक तौर पर निर्णय लिया था। प्रदेश में सरकार में अकेले ऐसे मंत्री हैं, जो किसी भी तरह के विवाद से परे हैं।

अनुराग आना नहीं चाहते

यदि राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर हिमाचल आने को तैयार नहीं हैं। ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अनुराग आना नहीं चाहेंगे, क्योंकि केंद्र सरकार में उनका कद बढ़ा है। जबकि प्रदेश में चुनाव के लिए एक साल से कम समय रह गया है।

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