नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट ने 42 नर्सों को ड्यूटी पर आने से रोका, पीड़ित नर्सों ने निकाला सरकार के खिलाफ मोर्चा

Shimla News : डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर से निकाली गई नर्सों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन नर्सों को जुलाई, 2019 में आऊटसोर्स पर भर्ती किया गया था लेकिन अब इन्हें सेवाएं समाप्त करने के पत्र थमाए जा रहे हैं। शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में नर्स पूनम ने कहा कि हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में 42 नर्सों को आऊटसोर्स के माध्यम से भर्ती किया गया था लेकिन अब नर्सिंग सुपरिंटैंडैंट ने नर्सों को ड्यूटी पर आने के लिए मना कर दिया है, ऐसे में अब सारी नर्सें शिमला पहुंची हैं और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिली हैं।

मुख्यमंत्री को नर्सों ने अवगत करवाया है कि जिन नर्सों को निकाला जा रहा है, उन्हें शीघ्र ही वापस नौकरी पर रखा जाए। पूनम का कहना है कि उन्होंने कोविड काल में दिन-रात ड्यूटी दी, कुछ नर्सों के छोटे बच्चे हैं फिर भी उन्होंने दिन-रात कोरोना काल में ड्यूटी दी है, ऐसे में नर्सों को नहीं निकाला जाना चाहिए। नर्सों का कहना है कि अभी वे कैबिनेट की बैठक का इंतजार कर रही हैं। अगर उसमें भी कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो उसके बाद सारी नर्सें कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।

नर्सों का कहना है कि कोरोना काल में उनमें से काफी सारी नर्सें पॉजिटिव भी आई हैं। अस्पताल में उन्हें उतनी अच्छी सुविधा नहीं मिल पाई है, जितनी अन्य स्टाफ को मिली है फिर भी कोविड काल में उन्होंने बेहतरीन सेवाएं दीं। वहीं कोरोना काल में हर विभाग ने फाइव-डे वीक काम किया लेकिन नर्सों ने पूरे 7 दिन काम किया है। इतना काम करने के बाद भी अब नर्सों को नौकरी से निकाला जा रहा है। सरकार को नर्सों के लिए कोई नीति बनानी चाहिए।

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