Himachal News: हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों में बीपीएल (BPL) सूची में बड़े स्तर पर हो रही छंटनी ने प्रदेश का सियासी पारा गरमा दिया है। जिला चंबा में सोमवार को गुस्साए लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि कांग्रेस सरकार बिना किसी पारदर्शिता और जमीनी सत्यापन के पात्र गरीब परिवारों को सूची से बाहर कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है।
90 प्रतिशत तक पुराने नाम गायब, गरीबों में हड़कंप
बीपीएल सूची से नाम कटने का विरोध अब उग्र होता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नई सूचियों में 80 से 90 प्रतिशत पुराने बीपीएल परिवारों के नाम हटा दिए गए हैं। बिना ग्राम सभा की अनुमति और बिना भौतिक सत्यापन के यह कार्रवाई की गई है। जय सिंह ने इसे एक सोची-समझी योजनाबद्ध कटौती करार दिया है, जिससे गरीब जनता में भारी रोष है।
छिन जाएंगी बुनियादी सुविधाएं और सरकारी लाभ
बीपीएल सूची से नाम हटने का सीधा असर गरीबों की आजीविका पर पड़ेगा। सूची से बाहर होते ही इन परिवारों से मुफ्त राशन, सस्ता इलाज, बच्चों की छात्रवृत्ति और आवास योजना जैसी सुविधाएं छिन जाएंगी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार गरीबों की ‘सुरक्षा ढाल’ तोड़ रही है। नियमों और कट-ऑफ का बहाना बनाकर अफसरशाही के जरिए पात्र लोगों का हक मारा जा रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों को भी इस पूरी प्रक्रिया से जानबूझकर दूर रखा गया है।
पंचायत चुनाव न करवाने पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान सरकार की नीयत पर भी सवाल खड़े किए गए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनाव समय पर नहीं करवा रही है। निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद अधिकारियों के जरिए मनमानी की जा रही है। आरोप है कि गांवों के विकास और योजनाओं की धनराशि की बंदरबांट के लिए यह रास्ता चुना गया है। जनता ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
