Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने जेलों में बंद कैदियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सरकार ने आजीवन कारावास काट रहे अपराधियों की रिहाई के नियम बदल दिए हैं। नई नीति के मुताबिक, अब रेप और मर्डर जैसे घिनौने अपराध करने वालों को सजा में कोई छूट नहीं मिलेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह नई गाइडलाइन जारी की है। इसका मकसद रिहाई की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।
हर 4 महीने में होगी समीक्षा
कैदियों की रिहाई के फैसले अब अधिकारियों की मर्जी पर नहीं होंगे। सरकार ने इसके लिए एक स्थायी ‘राज्य सजा समीक्षा बोर्ड’ (SSRB) का गठन किया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। बोर्ड हर चार महीने में कैदियों के मामलों की जांच करेगा। इस कमेटी में जेल महानिदेशक और हाई कोर्ट द्वारा नामित जिला जज भी शामिल होंगे।
सजा काटने के नए नियम तय
नई पॉलिसी में सजा की अवधि बिल्कुल साफ कर दी गई है। सामान्य अपराध के दोषियों को रिहाई के लिए कम से कम 14 साल जेल में बिताने होंगे। छूट मिलाकर यह सजा 20 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वहीं, हत्या के साथ बलात्कार, डकैती या आतंकी गतिविधियों में शामिल दोषियों के लिए नियम सख्त हैं। उन्हें कम से कम 20 साल की वास्तविक कैद और छूट सहित 25 साल की सजा पूरी करनी होगी।
महिला कैदियों को मिलेगी थोड़ी राहत
सरकार ने महिला कैदियों के लिए नियमों में थोड़ी नरमी बरती है। जो महिलाएं गंभीर धाराओं के दायरे में नहीं आतीं, वे 7 साल की वास्तविक सजा पूरी करने पर रिहाई की पात्र होंगी। छूट सहित उनकी कुल सजा 10 साल होनी चाहिए। रिहाई के समय कैदी को 10 हजार रुपये का निजी मुचलका भरना होगा। इसके साथ ही दो जमानतदार भी देने होंगे।
रिहाई के बाद भी रहेगी पुलिस की नजर
जेल से बाहर आने के बाद भी अपराधी पूरी तरह आजाद नहीं होंगे। उन्हें एक साल तक अपने नजदीकी पुलिस थाने में नियमित हाजिरी लगानी होगी। वे बिना अनुमति अपना जिला छोड़कर कहीं नहीं जा सकेंगे। बोर्ड यह भी देखेगा कि क्या दोषी ने जेल में 14 साल के दौरान अपना बर्ताव सुधारा है या नहीं। साथ ही उसके परिवार की आर्थिक स्थिति की भी जांच की जाएगी।
इन अपराधियों को जेल में ही काटनी होगी जिंदगी
सरकार ने कुछ श्रेणियों को रिहाई की लिस्ट से बिल्कुल बाहर रखा है। इसमें सुपारी लेकर हत्या करने वाले, गैंगस्टर, ड्रग तस्कर और ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी के हत्यारे शामिल हैं। इसके अलावा, जिन दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला गया है, उन्हें भी जल्दी रिहाई नहीं मिलेगी। जेल के अंदर या पैरोल के दौरान हत्या करने वालों को भी कोई माफी नहीं दी जाएगी।
