Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने कामगारों और मजदूरों को बड़ी खुशखबरी दी है। अब गरीब मजदूरों के बच्चे भी डॉक्टर और इंजीनियर बन सकेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की है कि पंजीकृत कामगारों के बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च सरकार उठाएगी। यह फैसला भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की समीक्षा बैठक में लिया गया। सरकार बच्चों को पीएचडी, एमबीबीएस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद देगी।
फीस का पूरा भुगतान करेगी सरकार
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कामगारों के बच्चों को दी जाने वाली सहायता राशि सरकारी संस्थानों की फीस के बराबर होनी चाहिए। इससे पैसों की कमी के कारण किसी भी मजदूर के बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकेगी। सरकार का मकसद है कि मजदूरों के बच्चे भी उच्च पदों पर पहुंचें।
दिव्यांग बच्चों और इलाज के लिए बड़ी राहत
बैठक में मुख्यमंत्री ने कामगारों के दिव्यांग बच्चों को लेकर भी संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे बच्चों को ‘मुख्यमंत्री सहारा योजना’ से जोड़ा जाए। इसके अलावा, बोर्ड में पंजीकृत सभी मजदूरों के ‘हिमकेयर कार्ड’ बनाए जाएंगे। इससे मजदूरों को मुफ्त और बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
शादी के लिए मिलते हैं 51 हजार रुपये
बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंजीकृत मजदूर को खुद की शादी के लिए 51 हजार रुपये मिलते हैं। इसके अलावा, मजदूर के दो बच्चों की शादी के लिए भी 51-51 हजार रुपये की मदद दी जाती है।
जल्द पूरा होगा ई-केवाईसी का काम
मुख्यमंत्री ने कामगारों के डेटा को अपडेट करने पर जोर दिया है। उन्होंने ‘हिम परिवार पोर्टल’ के जरिए सभी का ई-केवाईसी (E-KYC) जल्द पूरा करने को कहा। बैठक में बताया गया कि अब तक कल्याणकारी योजनाओं पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। प्रदेश में इस वक्त 4,76,052 कामगार पंजीकृत हैं।
