Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। अब एनडीपीएस मामलों में पकड़े गए आरोपियों को हिरासत में लेने से पहले पूरी जानकारी देनी होगी। यह जानकारी आरोपी की अपनी भाषा, खास तौर पर हिंदी में होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने यह फैसला एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया है। इससे आरोपियों के अधिकारों की रक्षा होगी और पुलिस की जवाबदेही तय होगी।
जजों की पीठ ने दिए आदेश
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। उन्होंने एनडीपीएस के एक आरोपी की याचिका का निपटारा करते हुए यह बात कही। हाई कोर्ट ने साफ किया कि आरोपी को हिरासत की जगह या उसकी प्रकृति के बारे में बताना जरूरी है। इसका उपयोग सरकार एनडीपीएस एक्ट की धारा तीन के तहत करती है। यह नियम हिरासत आदेश के पालन में व्यक्ति को जेल भेजने के लिए लागू होता है।
हिंदी में जानकारी देना क्यों जरूरी?
हाई कोर्ट का कहना है कि हिरासत के कारणों की जानकारी उसी भाषा में दी जानी चाहिए जिसे आरोपी समझता हो। तभी वह अपना बचाव सही तरीके से कर सकेगा। हिमाचल प्रदेश की आधिकारिक भाषा हिंदी है। इसलिए हिरासत का आदेश हिंदी में बताया जाना अनिवार्य है। अगर आरोपी हिंदी नहीं समझता है, तो उसे उसकी मातृभाषा में जानकारी देनी होगी। इससे कानून की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।
लिखित में बताने होंगे अधिकार
अदालत ने अधिकारों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस को हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके अधिकारों के बारे में लिखित रूप में बताना होगा। यह जानकारी भी हिंदी या आरोपी की भाषा में होनी चाहिए। इसमें आरोपी को अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने का अधिकार शामिल है। हाई कोर्ट ने इन आदेशों को लागू करने का जिम्मा सरकार को सौंपा है। प्रधान सचिव (गृह) को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
