Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि प्रदेश में काम कर रही कंपनियों को अब लैंड रेवेन्यू (Land Revenue) देना ही होगा। सीएम ने इसे राज्य का अधिकार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल के संसाधनों का उपयोग करने वाले डवेलपर्स को हर हाल में राजस्व चुकाना चाहिए।
12 जनवरी को होगी अगली बैठक
मुख्यमंत्री ने शिमला में डवेलपर्स के साथ एक अहम बैठक की। इसमें भू-राजस्व के मूल्यांकन पर चर्चा हुई। सीएम ने डवेलपर्स को भरोसा दिया कि सरकार उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए तैयार है। लैंड रेवेन्यू की दरों को तर्कसंगत बनाने पर भी विचार किया जा सकता है। इसी कड़ी में 25 मेगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के लिए 12 जनवरी को शिमला में एक और बैठक होगी। इसकी अध्यक्षता राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी करेंगे।
अपने हक के लिए लड़ रही सरकार
सीएम सुक्खू ने कहा कि हम प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। सरकार ने केंद्र और पड़ोसी राज्यों से अपने हक मांगे हैं। बीबीएमबी (BBMB) में स्थाई सदस्यता और 6500 करोड़ रुपये के एरियर की मांग भी मजबूती से रखी गई है। सीएम ने जोर देकर कहा कि सरकार लोगों के विकास के लिए संसाधनों का सही उपयोग कर रही है।

