Himachal Pradesh News: राज्य के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी राज्यों के आला अधिकारी हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के हित सर्वोपरि हैं और इसमें कोई समझौता नहीं होगा। उनका कहना है कि बाहर से आए अधिकारियों को सेवा करनी चाहिए, शासक बनने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
मंत्री ने स्पष्ट किया पूरा मामला
मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बात की। उन्होंने अपनी बात दोहराई। सिंह ने कहा कि हिमाचल में सेवा के लिए आने वाले सभी आईएएस, आईपीएस अधिकारियों का स्वागत है। लेकिन प्रदेश के हितों की रक्षा करना उनका पहला दायित्व है।
उन्होंने मंडी में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के भाषण का समर्थन किया। मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा दलगत राजनीति से ऊपर है। यह हिमाचल के लोगों के हितों से जुड़ा मामला है।
“पैसों की बंदरबांट बर्दाश्त नहीं”
विक्रमादित्य सिंह ने एक बड़ा आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पैसों की बंदरबांट करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बात सहन नहीं की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि हिमाचल के संसाधन यहां के लोगों के हैं। केंद्र से आने वाला पैसा भी हिमाचल के लोगों का ही है। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में किसी तरह का समझौता नहीं होगा।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई बहस
यह विवाद मंत्री की एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ। अपनी पोस्ट में उन्होंने कुछ बाहरी राज्यों के अधिकारियों पर निशाना साधा था।
उन्होंने लिखा था कि कुछ अधिकारियों को हिमाचल से कोई ख़ास सरोकार नहीं है। समय रहते उनसे निपटना जरूरी है। इस पोस्ट के बाद से ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई।
मंत्री ने दिया यह संदेश
लोक निर्माण मंत्री ने एक स्पष्ट संदेश दिया है। उनका कहना है कि बाहर से आए अधिकारी हिमाचल के अधिकारियों से सीख लें।
जब तक वे हिमाचल में हैं, उन्हें यहां के लोगों की सेवा करनी चाहिए। शासक बनने की गलती नहीं करनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे को उचित मंच पर भी उठाएंगे। ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों।
