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सात सौ करोड़ के घाटे के बाद सोमवार से सड़कों पर दौड़ेगी बसे, 50 प्रतिशत सवारियों की होगी इजाजत

हिमाचल प्रदेश में सवा महीने बाद परिवहन सेवाएं बहाल हो गई हैं। सरकारी बसें कोरोना कर्फ्यू के कारण सात मई से सड़कों की धूल फांक रही थीं। जबकि निजी बसें पांच मई से ही बंद है। निजी बस आपरेटर तब से हड़ताल पर हैं। अभी सरकार ने अन्य राज्यों के लिए बसें बहाल नहीं की है। इंटरस्टेट यानी अंतरराज्यीय बसें पूरी तरह से बंद रहेंगी। जब तक कोरोना संक्रमण की स्थितियों में सुधार नहीं आ जाता, तब तक ये बसें आरंभ नहीं होगी।

प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के अंदर बसें आरंभ करने का बड़ा फैसला लिया गया। ये 50 फीसद आक्यूपेंसी के साथ चलेंगी। कोरोना काल में पहले भी 50 फीसद आक्यूपेंसी के साथ बसें चली थीं।

तब लोग कोरोना के डर से घरों से कम संख्या में बाहर निकल रहे थे। पिछले वर्ष के अंत में सरकार ने आक्यूपेंसी सौ फीसद तक कर दी थी। खड़ी सवारियां ले जाने की अनुमति नहीं दी। जैसे ही इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर आई, लोगों ने बसों में सफर करना फिर कम कर दिया।

700 करोड़ का हुआ घाटा

कोरोना काल में हिमाचल पथ परिवहन निगम को सात सौ करोड़ से अधिक का घाटा हुआ है। पिछले साल सरकार ने 249 करोड़ की आर्थिक मदद भी की है। एक महीने से बसें बंद रहने के कारण कमाई शून्य हो गई थी। हालांकि अगर बसों में कम सवारियां बैठती है, तब भी निगम को घाटा उठाना पड़ता है। इससे ईंधन का खर्च भी पूरा नहीं हो पाता है।

दो करोड़ की कैसे होगी आय

निगम को कभी एक दिन में डेढ़ से दो करोड़ की आय होती थी। लेकिन कोरोना काल में ये काफी कम हो गई। आलम यह हुआ कि निगम के पास कर्मचारियों को वेतन तक देने के लाले पड़ गए। निगम में दस हजार कर्मचारी हैं, जबकि साढ़े चार हजार पेंशनर हैं।

कितनी बसें

प्रदेश में सरकारी बसों की संख्या 3200 हैं। जबकि 3300 बसें निजी ऑपरेटर चलाते हैं। सरकारी की तरह ही निजी बस ऑपेटर भी घाटा झेल रहे हैं।

कल होगी बैठक

हिमाचल प्रदेश निजी बस आपरेटर संघ केमहासचिव रमेश कमल ने कहा कि कल बैठक होगी। शनिवार सुबह दस बजे होने वाली इस वर्चुअल बैठक में आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इनमें तय होगा कि हड़ताल जारी रखी जाए या नहीं।


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