Himachal News: पहाड़ों की ताजी हवा भी अब लोगों की सेहत नहीं बचा पा रही है। हिमाचल प्रदेश में 20 लाख से ज्यादा लोग मोटापे की चपेट में आ गए हैं। इतना ही नहीं, डायबिटीज (मधुमेह) का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में आए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़े डराने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की 53 फीसदी महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। यह बीमारी का ग्राफ राष्ट्रीय औसत से भी कहीं ज्यादा है।
आधी आबादी में खून की कमी
सर्वेक्षण में सामने आया है कि हिमाचल में अनीमिया (खून की कमी) की स्थिति काफी गंभीर है। इसका सबसे बुरा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 6 से 59 महीने के 55.4 प्रतिशत बच्चे अनीमिया से ग्रस्त हैं। प्रदेश में ऐसे प्रभावित बच्चों की संख्या लगभग तीन लाख है। वहीं, 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में से 53 प्रतिशत में खून की कमी पाई गई है। इस आयु वर्ग की करीब 20.8 लाख महिलाएं इस समस्या का सामना कर रही हैं। पुरुषों में भी यह आंकड़ा 18.6 फीसदी है।
मोटापे में राष्ट्रीय औसत से आगे निकला हिमाचल
हिमाचल के लोग अब मोटापे का शिकार तेजी से हो रहे हैं। यह मोटापा ही डायबिटीज जैसी अन्य बीमारियों का मुख्य कारण बन रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 20 साल से अधिक आयु के वयस्कों में सामान्य मोटापा 38.7 प्रतिशत है। जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 28.6 प्रतिशत ही है। पेट के मोटापे की स्थिति और भी खराब है। इसने 56.1 प्रतिशत हिमाचलियों को घेर रखा है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 39.5 प्रतिशत है।
डायबिटीज ने बजाई खतरे की घंटी
आईसीएमआर (ICMR) और आईएनडीआईएबी (INDIAB) के अध्ययन ने डायबिटीज को लेकर चिंताजनक खुलासा किया है। पहाड़ी राज्य में डायबिटीज ने 13.5 प्रतिशत लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत (11.4 फीसदी) से काफी ज्यादा है। इसके अलावा, प्री-डायबिटीज के मामले 18.7 फीसदी हैं, जो राष्ट्रीय औसत 15.3 प्रतिशत से ऊपर है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
शोध से निकलेगा बीमारी का हल
बीमारियों के इस बढ़ते ग्राफ पर विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान पंडोह की प्रभारी डॉक्टर विनीता नेगी ने माना कि महिलाओं और बच्चों में खून की कमी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि मोटापा और डायबिटीज के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। अब इस शोध के आधार पर इन बीमारियों के बढ़ने के कारणों को तलाशा जाएगा। कारण पता चलने के बाद ही इसका सही निदान और निवारण संभव हो पाएगा।

