Himachal News: हिमाचल प्रदेश के शिक्षा (Education) विभाग में लापरवाही पर सरकार सख्त हो गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सात जिलों के अफसरों को कड़ी चेतावनी दी है। इन जिलों ने विभागीय जांच के लिए मांगी गई जानकारी समय पर नहीं भेजी थी। शिक्षा निदेशक ने साफ कर दिया है कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चेतावनी पाने वाले जिलों में ऊना, लाहौल-स्पीति और बिलासपुर शामिल हैं। इसके अलावा किन्नौर, कुल्लू, कांगड़ा और मंडी के उपनिदेशकों को भी नोटिस जारी हुआ है।
अफसरों की लापरवाही पर एक्शन
उच्च शिक्षा (Education) निदेशालय ने पेंडिंग जांच निपटाने की योजना बनाई थी। इसके लिए फील्ड से अनुभवी अधिकारियों के नाम मांगे गए थे। तय समय बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड नहीं भेजा गया। इसे प्रशासनिक काम में बड़ी बाधा माना गया है। शिक्षा निदेशक ने 10 दिनों के भीतर जानकारी भेजने का आदेश दिया है। अगर अब भी नाम नहीं भेजे गए तो इन अफसरों पर गाज गिर सकती है।
बनेगा जांच अधिकारियों का स्पेशल पूल
उच्च शिक्षा (Education) निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्टें सालों तक लटकी रहती हैं। इससे निपटने के लिए विभाग एक स्थायी पूल बना रहा है। हर जिले के उपनिदेशकों से 10 प्रिंसिपल और 10 अधीक्षकों के नाम मांगे गए हैं। शर्त यह है कि इन अधिकारियों की कम से कम पांच साल की नौकरी बची हो। जो अफसर जल्द रिटायर होने वाले हैं, उनका चयन नहीं होगा।
शिमला में मिलेगी खास ट्रेनिंग
चयनित अधिकारियों को शिमला स्थित हिप्पा (HIPPA) में ट्रेनिंग दी जाएगी। यहाँ उन्हें शिक्षा (Education) विभाग के नियमों और जांच प्रक्रिया की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसमें चार्जशीट तैयार करना और गवाहों के बयान लेना शामिल है। सबूत जुटाने और रिपोर्ट लिखने के तरीके भी बताए जाएंगे। अक्सर अनुभव की कमी से जांच में देरी होती है। प्रशिक्षित अधिकारी होने से फैसले जल्दी और पारदर्शी तरीके से हो सकेंगे।
