Hamirpur News: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में जालसाजी का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) विभाग के नाम पर एक फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तैयार किया गया। लेकिन शातिरों से एक ऐसी भारी चूक हो गई, जिसने पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने जिस इलाके के लिए टीसीपी की एनओसी बनाई, वह असल में नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस खुलासे के बाद हिमाचल पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह फर्जी दस्तावेज कहां और कैसे तैयार किया गया।
अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश
विभागीय जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने की पूरी कोशिश की। यह फर्जी एनओसी शहर के वार्ड नंबर-10 के लिए दिखाई गई थी। नियम के मुताबिक, यह क्षेत्र नगर निगम के तहत आता है, न कि टीसीपी विभाग के। इसके बावजूद, फर्जीवाड़ा करने वालों ने टीसीपी विभाग के लेटरहेड का इस्तेमाल किया। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता को भी इसकी एक कॉपी भेज दी। इस हरकत से सरकारी तंत्र को गुमराह करने की मंशा साफ जाहिर होती है।
हस्ताक्षर और डिस्पैच नंबर भी निकले फर्जी
इस मामले में हिमाचल के हमीरपुर स्थित सदर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई है। टीसीपी विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि एनओसी पर किए गए प्लानिंग ऑफिसर के हस्ताक्षर पूरी तरह नकली हैं। इसके अलावा, दस्तावेज पर लिखा गया डिस्पैच नंबर भी विभाग के असली रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। यह शिकायत बीते साल 29 दिसंबर को दर्ज कराई गई थी। जब कोई अनजान व्यक्ति कार्यालय में एनओसी लेकर पहुंचा, तब जाकर विभाग को अपने नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े की भनक लगी।
शैक्षणिक संस्थान से जुड़े हैं तार
हमीरपुर के एसपी बलवीर ठाकुर ने मामले पर अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला एक शैक्षणिक संस्थान की एनओसी से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। नगर योजनाकार हरजिंद्र सिंह ने भी पुष्टि की है कि जिस क्षेत्र का जिक्र दस्तावेज में है, वह उनके विभाग के दायरे से बाहर है। पुलिस अब बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर इतनी सफाई से यह फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किया। हिमाचल पुलिस जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद कर रही है।

