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हाई कोर्ट ने सरकार को दिए टेस्टिंग बढ़ाने के आदेश, पूछा, 18 प्लस लोगों का टीकाकरण कब शुरू होगा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कोरोना टेस्टिंग बढ़ाने के लिए लेबोरेटरी, क्लीनिक व अस्पतालों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया हैं। कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि रैपिड एंटीजन, आरटी-पीसीआर के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार करें। बड़े शहरों में टेस्टिंग बढ़ाने के साथ सभी उपकरणों से लैस मोबाइल वैन को भी इसमें शामिल किया जाए। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए सरकार को आदेश देने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ये आदेश दिए हैं।

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने नाहन निवासी आशुतोष गुप्ता की याचिका की सुनवाई करते हुए भविष्य में महामारी के अधिक बढऩे की आशंका जताते हुए डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल बढ़ाने को कहा है।

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की सहायता से अस्थायी अस्पताल बनाने पर विचार किया जाए। सभी अस्पतालों में वेंटीलेटर, आक्सीजन व अन्य सुविधाएं सुचारू रूप से देना सुनिश्चित किया जाए। सभी चिकित्सकों, नर्सों, वार्ड ब्वॉय व अन्य स्टाफ को पीपीई किट, मास्क व सैनिटाइजर मुहैया करवाए जाएं।

टेस्टिंग सेंटर की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं

कोर्ट ने कहा कि मीडिया के माध्यम से कोविड अस्पताल व टेस्टिंग सेंटर की लोगों को जानकारी दी जाए। जो निजी अस्पताल कोविड टेस्ट व अन्य सुविधाएं देने में असमर्थता जताते हैं, उनके खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट एवं इसेंशियल सॢवसेज मेंटेनेंस एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। सरकार से महामारी की रोकथाम के लिए कदम उठाने के बारे में सूचना देने को कहा है। इसमें मुख्य रूप से उचित बेड व आक्सीजन सुविधा शामिल है।

18 प्लस के लोगों का टीकाकरण कब होगा शुरू

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि 18 से 44 साल की आयु के लोगों का टीकाकरण कब शुरू होगा, इस बाबत सरकार स्पष्ट करे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं राज्य सरकार को जीवनरक्षक दवाएं प्रदान करे। सरकार को इस संबंध में उठाए कदमों से भी अवगत करवाने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 10 मई को होगी।

केंद्र व राज्य सरकार से जवाबतलब

हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के कारण चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने को लेकर दायर याचिका में केंद्र व राज्य सरकार से नौ मुख्य आरोपों पर जवाब तलब किया है। प्रार्थी आशुतोष गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में चिकित्सा संकट है। इस कारण न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी संक्रमण में उछाल आया है। पिछले कुछ दिनों से बहुत मौतें हुई हैं। इसका कारण आक्सीजन की किल्लत होना है। प्रदेश में रेमडेसिविर व फेवीपिरावीर समेत जरूरी दवाओं की किल्लत है, जो संक्रमितों के लिए जीवनोपयोगी हैं। पांच शहरों शिमला, धर्मशाला, मंडी, नाहन व चंबा के अस्पतालों को डेडीकेटेड कोविड-19 अस्पताल बनाया गया है परंतु अन्य जिलों में ऐसी सुविधा नहीं है। इस कारण मरीजों को इन पांच शहरों के अस्पतालों में आना पड़ रहा है। सरकारी व निजी अस्पतालों में कितने सामान्य बेड, कितने आइसीयू, कितने वेंटीलेंटर हैं, इसकी जानकारी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। प्रार्थी ने इसके साथ ही कई अन्य आरोप भी लगाए हैं। खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार से दस मई को होने वाली सुनवाई के दौरान जवाबतलब किया है।

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