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हाई कोर्ट ने राज्यपाल के सचिव और एचपीयू रजिस्टार से वीसी की नियुक्ति मामले में मांगा जबाब

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के कुलपति डॉ. सिकंदर कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्यपाल के प्रधान सचिव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। डॉ. सिकंदर कुमार से भी जवाब मांगा गया है। प्रार्थी धर्मपाल की ओर से दायर याचिका कि सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए गए कुलपति सहित विश्वविद्यालय के चांसलर यानी राज्यपाल के प्रधान सचिव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है। मामले की आगामी सुनवाई बीस मई को निर्धारित की गई है। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद इन्हें नोटिस जारी नही किया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुलपति की नियुक्ति नियमों के खिलाफ की गई है।

याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि प्रतिवादी कुलपति को यूजीसी की ओर से जारी रेगुलेशन के तहत 19.3.2011 को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया था। 29.8.2017 को हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। प्रतिवादी ने चयन कमेटी को गुमराह करते हुए अपने आवेदन में अनुभव के बारे में गलत तथ्य दिए। प्रार्थी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि प्रतिवादी को आदेश दिए जाएं कि वह एचपीयू के वाइस चांसलर की नियुक्ति के लिए अपनी योग्यता अदालत को बताए और यदि उसकी योग्यता यूजीसी के रेगुलेशन के विपरीत पाई जाती है तो उस स्थिति में उसकी नियुक्ति रद्द की जाए। सोमवार दोपहर बाद इस मामले को लेकर लंबी बहस चली। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सरकार के अधिवक्ताओं की दलीलों से नाखुशी जताते हुए नोटिस जारी करने के आदेश दिए।

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