Health News: सर्दियों के मौसम में दिल के दौरे के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के कारण खून गाढ़ा होना एक प्रमुख कारण है। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। युवा आबादी भी इसकी चपेट में आ रही है।
ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्तचाप स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। शरीर में पानी की कमी भी होने लगती है। इन सभी कारकों का संयोजन रक्त को गाढ़ा बना देता है। गाढ़ा रक्त थक्के बनाने लगता है।
युवाओं में बढ़ रहा है खतरा
पहलेहृदय रोग को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। अब स्थिति बदल गई है। बीस से चालीस वर्ष की आयु के युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में युवा रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
युवाओं की आधुनिक जीवनशैली इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, शारीरिक गतिविधि की कमी और अस्वास्थ्यकर आहार मुख्य कारण हैं। सर्दियों में ये आदतें और भी नुकसानदेह हो जाती हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
जीएमसीएच-32 केकार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. जीत राम ने चेतावनी दी है। उनके अनुसार गाढ़े रक्त के थक्के पैरों की नसों में जमा होते हैं। ये थक्के फेफड़ों के रास्ते हृदय तक पहुंच सकते हैं। इससे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होती है।
डॉक्टरों का कहना है कि सुबह चार से दस बजे का समय सबसे संवेदनशील होता है। इस दौरान रक्तचाप अपने आप बढ़ा रहता है। ठंड के कारण नसें सिकुड़ी रहती हैं। सुबह व्यायाम करने वालों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
जीवनशैली में बदलाव जरूरी
विशेषज्ञ युवाओंको सर्दियों में भी पर्याप्त पानी पीने की सलाह देते हैं। गर्म पानी का सेवन फायदेमंद रहता है। जंक फूड और अत्यधिक वसायुक्त भोजन से बचना चाहिए। नियमित हल्का व्यायाम लाभकारी साबित हो सकता है।
हल्दी, अदरक और लहसुन जैसे प्राकृतिक पदार्थ थक्के बनने से रोकते हैं। धूम्रपान और शराब के सेवन से दूरी बनानी चाहिए। तनाव प्रबंधन भी हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महिलाओं और बच्चों के लिए भी जोखिम
रजोनिवृत्तिके बाद महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है। हार्मोनल परिवर्तन इसका कारण बनते हैं। बच्चों में भी जोखिम के कारक दिखाई दे रहे हैं। कम शारीरिक गतिविधि और अधिक स्क्रीन टाइम चिंता का विषय है।
पढ़ाई का तनाव भी बच्चों के हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। विटामिन डी की कमी सर्दियों में एक आम समस्या है। यह कमी भी हृदय स्वास्थ्य पर असर डालती है।
इन बातों का रखें ध्यान
अत्यधिक हीटर केउपयोग से बचना चाहिए। बाहरी गर्मी शरीर के प्राकृतिक तापमान को बाधित करती है। गर्म कपड़े पहनकर और कुछ समय धूप में बिताकर लाभ उठाया जा सकता है। यह रक्त के गाढ़ेपन को रोकने में मदद करता है।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नजर रखनी चाहिए। शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

