उम्र सिर्फ 25 और दिल फेल! युवाओं में क्यों बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा? आज ही बदलें ये आदतें

Health News: पहले हार्ट अटैक को केवल बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। आजकल युवाओं में दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जिम में वर्कआउट करते, ऑफिस में काम करते या चलते-फिरते अचानक गिरने की घटनाएं अब बेहद आम हो चुकी हैं।

बाहरी फिटनेस का भ्रम और असली सच्चाई

कई लोग मानते हैं कि जो लोग जिम जाते हैं और फिट दिखते हैं, उन्हें दिल की बीमारियां नहीं हो सकतीं। लेकिन हाल के वर्षों में आए मामले बताते हैं कि केवल बाहरी फिटनेस ही पर्याप्त नहीं है। पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले सेलिब्रिटीज की अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु ने इस कड़वी सच्चाई को सबके सामने ला दिया है।

कम उम्र में हार्ट अटैक बढ़ने का सबसे मुख्य कारण हमारी बदलती और बेहद खराब जीवनशैली है। आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में अनियमित दिनचर्या आम हो गई है। लोग देर रात तक जागते हैं, फास्ट फूड का अधिक सेवन करते हैं और पर्याप्त नींद नहीं लेते। इसके अलावा मानसिक तनाव भी दिल को कमजोर कर रहा है।

Junk food

बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक निष्क्रियता

युवाओं में घंटों मोबाइल, लैपटॉप या टीवी के सामने बैठे रहने की आदत से शारीरिक सक्रियता पूरी तरह खत्म हो गई है। गतिहीन जीवनशैली दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इसके साथ ही, तनाव दूर करने के नाम पर धूम्रपान और शराब का बढ़ता सेवन युवाओं के दिल की धड़कनों को समय से पहले रोक रहा है।

उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह (डायबिटीज) और बढ़ता मोटापा जैसी गंभीर समस्याएं अब कम उम्र में ही घेर रही हैं। ये सभी बीमारियां मिलकर हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद से युवाओं में दिल से जुड़ी जटिलताओं में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Stress

खतरनाक साबित हो रहा है ‘साइलेंट हार्ट अटैक’

आजकल ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें मरीज को पहले से कोई गंभीर लक्षण महसूस नहीं होते। अक्सर लोग हल्के सीने में दर्द, असामान्य थकान, सांस फूलना या अचानक होने वाली बेचैनी जैसे शुरुआती संकेतों को सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज करने की बड़ी गलती कर बैठते हैं।

दिल को पूरी तरह स्वस्थ रखने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। अपनी दैनिक दिनचर्या में नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और कम से कम 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद को जरूर शामिल करें। खाने में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम तेल वाले भोजन का ही हमेशा इस्तेमाल करें।

मानसिक तनाव को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए रोजाना योग, ध्यान और मेडिटेशन का सहारा लें। इसके अलावा, साल में कम से कम एक बार अपनी पूरी बॉडी का हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं। छोटी-छोटी सावधानियों और आदतों में सकारात्मक बदलाव लाकर आप इस गंभीर और जानलेवा खतरे से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

Author: Asha Thakur

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