Health News: भारतीय भोजन में रोटी एक मुख्य आहार है। पर क्या आप जानते हैं आपकी सेहत के लिए कौन सा आटा सही रहेगा। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार अलग अलग आटे के अलग फायदे हैं। अपने स्वास्थ्य लक्ष्य के अनुसार आटा चुनना एक गेम चेंजर हो सकता है। आइए जानते हैं किस स्वास्थ्य स्थिति में किस आटे की रोटी फायदेमंद है।
पोषण विशेषज्ञ खुशी छाबड़ा के अनुसार जौ की रोटी में घुलनशील फाइबर भरपूर होता है। यह पेट की चर्बी कम करने और इंसुलिन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मददगार है। यह लिवर और दिल के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी मानी जाती है। प्रीडायबिटीज या फैटी लिवर वाले लोगों के लिए यह उपयुक्त है।
रागी और बाजरे के फायदे
रागीकी रोटी कैल्शियम और आयरन का अच्छा स्रोत है। यह वजन घटाने और ब्लड शुगर नियंत्रण में सहायक है। मेनोपॉज के बाद की महिलाओं की हड्डियों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है। कमजोर पाचन वालों को इससे परहेज करना चाहिए।
बाजरे की रोटी आयरन और जिंक से भरपूर होती है। यह एनीमिया से पीड़ित लोगों और अधिक शारीरिक गतिविधि करने वालों के लिए उत्तम है। यह ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाने में मदद करती है। शरीर में अधिक गर्मी या आईबीएस की समस्या वालों को इसे नहीं खाना चाहिए।
मल्टीग्रेन और बेसन की रोटी
मल्टीग्रेन रोटीफाइबर और बी विटामिन्स का खजाना है। यह पाचन तंत्र के लिए बेहतरीन मानी जाती है। पीसीओएस या मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोग इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ग्लूटेन इनटॉलरेंस वालों के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
बेसन या चने के आटे की रोटी प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। यह इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर को स्थिर रखती है। मोटापा और पीसीओडी से निपटने में यह मददगार साबित हो सकती है। पेट में गैस बनने की समस्या वालों को सावधानी बरतनी चाहिए।
ज्वार और ओट्स के गुण
ज्वार कीरोटी में एंटीऑक्सीडेंट और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह आंत के स्वास्थ्य को बेहतर करने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है। ग्लूटेन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए यह एक सुरक्षित विकल्प है। पाचन खराब रहने वालों को इससे बचना चाहिए।
ओट्स की रोटी प्रोटीन और घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत है। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सुधारने और ब्लड शुगर स्पाइक को कम करने में प्रभावी है। डायबिटीज रोगियों और वजन घटाने वालों के लिए यह एक स्वस्थ विकल्प है। संवेदनशील पाचन तंत्र वालों को इससे समस्या हो सकती है।
सोया और चावल के आटे की विशेषताएं
सोयाआटे की रोटी में संपूर्ण प्रोटीन पाया जाता है। यह मांसपेशियों के निर्माण और हार्मोन संतुलन के लिए उपयोगी है। शाकाहारी लोग और प्रोटीन की कमी वाले इसे खा सकते हैं। थायराइड की समस्या से ग्रस्त लोगों को इससे परहेज करना चाहिए।
चावल के आटे की रोटी पचाने में बहुत आसान होती है। पाचन तंत्र कमजोर होने पर यह एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है और ग्लूटेन मुक्त भी है। मधुमेह रोगियों के लिए यह उपयुक्त नहीं मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गेहूं के आटे पर निर्भर न रहें। विभिन्न प्रकार के आटे को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। यह शरीर को विविध पोषक तत्व प्रदान करता है। किसी भी नए आटे को डाइट में शामिल करने से पहले अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखें।

