Health News: पेट में दर्द, जलन और गैस की समस्या को अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन समस्याओं के सटीक कारण का पता लगाकर समय पर इलाज कराना जरूरी है। यह सावधानी गैस्ट्रिक कैंसर या अन्य गंभीर पाचन रोगों के खतरे को कम कर सकती है। पेट संबंधी परेशानियों के पीछे अपच, संक्रमण से लेकर पेप्टिक अल्सर जैसे कारण हो सकते हैं।
पित्त की पथरी और आईबीएस भी हो सकते हैं कारण
पेट दर्द केसाथ जलन या गैस होने का एक प्रमुख कारण पित्त की पथरी हो सकता है। पथरी होने पर नलिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं। इससे विशेष रूप से वसायुक्त भोजन के बाद तेज दर्द का अनुभव होता है। एक अन्य सामान्य कारण इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम यानी आईबीएस है। इसमें पेट में सूजन और रुक-रुककर ऐंठन होती है जो अक्सर तनाव से जुड़ी हो सकती है।
अनियमित जीवनशैली है प्रमुख वजह
अनियमित भोजन,उच्च तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी पेट की समस्याओं के मुख्य कारणों में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आजकल लोग प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने लगे हैं। इससे पेट संबंधी रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जो लोग बहुत तेजी से भोजन करते हैं या कार्बोनेटेड पेय पदार्थ पीते हैं उनमें यह समस्या आम है।
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) का खतरा
लगातार पेट मेंजलन की शिकायत गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग यानी जीईआरडी का लक्षण हो सकती है। इस स्थिति में पेट का अम्ल वापस भोजन नली में आ जाता है। जीईआरडी के पीछे मोटापा, गर्भावस्था या हर्निया जैसे कारण हो सकते हैं। धूम्रपान, चॉकलेट, शराब या टमाटर जैसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन भी इसका कारण बन सकता है।
सही निदान के लिए जांच है जरूरी
पेट दर्द और जलन केसटीक कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई जांचों की सलाह देते हैं। इनमें अल्ट्रासाउंड, एंडोस्कोपी या सांस परीक्षण शामिल हो सकते हैं। ये लक्षण एपेंडिसाइटिस, पैंक्रियाटाइटिस या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत भी दे सकते हैं। इसलिए लगातार बनी रहने वाली समस्या में विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।
राहत के लिए दवाएं और आहार में बदलाव
पेट दर्द सेतात्कालिक राहत के लिए डॉक्टर अक्सर एंटासिड दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। ये दवाएं पेट के अम्ल को कम करने में मदद करती हैं। दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए आहार में बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है। भारी भोजन के बजाय दिन में छोटे-छोटे कई आहार लेने की सलाह दी जाती है।
प्रोबायोटिक्स का सेवन हो सकता है लाभदायक
पाचन तंत्र कोस्वस्थ रखने में प्रोबायोटिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। दही, छाछ और किण्वित खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट की समस्याओं में राहत मिल सकती है। ये आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इनका सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त रख सकता है।
लक्षणों में लगातार बदलाव पर नजर रखना और सोच-समझकर आहार में चीजों को शामिल करना जरूरी है। असामान्य या गंभीर लक्षण महसूस होने पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। समय पर किया गया उपचार जटिलताओं को रोक सकता है और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद कर सकता है।

