Health News: सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में पाए जाने वाले सामान्य कैंसर में से एक है। समय पर पहचान न होने के कारण यह जानलेवा साबित होता है। इसलिए इसके लक्षणों और बचाव के तरीकों की जानकारी जरूरी है। शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते। बीमारी बढ़ने पर शरीर में कुछ चेतावनी संकेत दिखाई देने लगते हैं। इन संकेतों को पहचानकर और सही बचाव अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।
यह कैंसर गर्भाशय के मुख यानी सर्विक्स की कोशिकाओं में शुरू होता है। मानव पेपिलोमावायरस यानी एचपीवी का संक्रमण इसका प्रमुख कारण माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े भी इसके प्रसार को रोकने पर जोर देते हैं। नियमित जांच और टीकाकरण इससे लड़ने के प्रभावी हथियार हैं।
सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
कैंसर के विकसित होने पर कुछ खास लक्षण दिख सकते हैं। असामान्य रक्तस्राव एक प्रमुख चेतावनी संकेत है। इसमें संभोग के बाद रक्तस्राव होना शामिल है। पीरियड्स के बीच के समय में या रजोनिवृत्ति के बाद भी रक्तस्राव हो सकता है। मासिक धर्म चक्र में बदलाव भी देखा जा सकता है।
पीरियड्स में सामान्य से अधिक रक्तस्राव या लंबे समय तक रक्तस्राव होना चिंताजनक है। योनि से असामान्य स्राव भी एक लक्षण है। यह स्राव पानी जैसा या खून मिला हुआ हो सकता है। कई बार इससे दुर्गंध भी आती है। श्रोणि क्षेत्र में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है।
संभोग के दौरान दर्द की शिकायत भी सामने आती है। बिना किसी स्पष्ट कारण वजन कम होना भी ध्यान देने योग्य बात है। ये सभी लक्षण किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के भी हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर से परामर्श कर सही निदान कराना जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक कौन से हैं?
एचपीवी संक्रमण इस बीमारी का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं में यह जोखिम बढ़ जाता है। तंबाकू उत्पादों का सेवन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। इससे शरीर एचपीवी संक्रमण से प्रभावी ढंग से लड़ नहीं पाता।
एक से अधिक यौन साथी होना भी जोखिम बढ़ाता है। साथ ही यदि आपके साथी के कई यौन साथी हैं तो भी खतरा रहता है। कम उम्र में यौन संबंध शुरू करने से भी एचपीवी के संपर्क में आने की आशंका बढ़ती है। अन्य यौन संचारित रोग भी स्थिति को जटिल बना सकते हैं।
क्लैमाइडिया, गोनोरिया, एचआईवी जैसे संक्रमण भी जोखिम बढ़ाते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाली महिलाएं अधिक संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग भी एक कारक हो सकता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर नियमित जांच न हो पाना भी एक समस्या है।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे करें?
एचपीवी वैक्सीन इस कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यह टीका नौ से चौदह वर्ष की आयु की लड़कियों को लगाया जाता है। वयस्क महिलाएं भी डॉक्टर की सलाह से यह टीका लगवा सकती हैं। टीकाकरण एचपीवी के उच्च जोखिम वाले प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करता है।
नियमित पैप स्मीयर टेस्ट या पैप टेस्ट करवाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें सर्विक्स की कोशिकाओं का नमूना लेकर जांच की जाती है। इससे कैंसर पूर्व की स्थितियों का पता लगाया जा सकता है। इन स्थितियों का समय पर इलाज संभव है।
एचपीवी डीएनए टेस्ट भी एक उन्नत जांच विधि है। सुरक्षित यौन संबंध बनाए रखने से संक्रमण का जोखिम कम होता है। कंडोम का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। यह पूर्ण सुरक्षा नहीं देता लेकिन जोखिम कम करता है।
जीवनशैली में बदलाव भी हैं जरूरी
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। स्वस्थ आहार लेना भी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। फल, सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन लाभकारी होता है। नियमित शारीरिक गतिविधि भी स्वास्थ्य के लिए अच्छी है।
लक्षण दिखने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही इस गंभीर बीमारी से बचाव की पहली सीढ़ी है। सही जानकारी और समय पर कार्रवाई कई जानें बचा सकती है।
