Haryana News: सिर्फ आठ साल की जेल सजा के दौरान 405 दिन जेल के बाहर। यह अनोखा रिकॉर्ड हरियाणा के एक दोषी कैदी का है। दो महिला अनुयायियों के बलात्कार और एक पत्रकार की हत्या के दोषी गुरमीत राम रहीम सिंह ने फिर पैरोल पाई है। तीन जनवरी को वह सुनारिया जेल से चालीस दिन की छुट्टी पर बाहर आए।
यह उनकी पंद्रहवीं पैरोल है। हरियाणा पुलिस की गाड़ियों ने उनका सायरन बजाते हुए स्वागत किया। इस घटना ने कानूनी प्रक्रिया और सजा के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सामान्य कैदी जेल में दिन गिनते हैं, वहीं दूसरी ओर यह विशेष व्यवहार चौंकाने वाला है।
दोषी को मिली दोहरी सजा
गुरमीत राम रहीम सिंह कोदो अलग-अलग मामलों में सजा सुनाई गई है। अगस्त 2017 में दो साध्वियों के बलात्कार के मामले में उन्हें बीस साल की कैद मिली। जनवरी 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इन दोनों सजाओं का पालन समवर्ती रूप से हो रहा है।
इसके बावजूद वह लगातार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आते रहे हैं। पहली बार अक्टूबर 2020 में एक दिन की छुट्टी मिली थी। तब से अब तक उन्होंने पंद्रह बार जेल से बाहर का समय बिताया है। हर बार छुट्टी का कारण धार्मिक या पारिवारिक आयोजन बताया जाता है।
हरियाणा सरकार ने बदले थे नियम
साल 2022 मेंहरियाणा सरकार ने जेल नियमों में बदलाव किया। नया कैदी अच्छे आचरण अस्थायी छुट्टी अधिनियम लाया गया। इसके तहत दोषी कैदी साल में दो बार चालीस-चालीस दिन की पैरोल ले सकते हैं। सामान्यतः जघन्य अपराधों के दोषियों को यह सुविधा नहीं मिलती।
लेकिन हरियाणा प्रशासन ने राम रहीम को जघन्य अपराधी की श्रेणी में नहीं रखा। इस तरह नए नियम का लाभ उन्हें मिलता रहा। विशेषज्ञ इस नीतिगत निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि बलात्कार और हत्या जघन्य अपराध हैं।
पीड़ित परिवार ने उठाए सवाल
पत्रकार रामचंद्र छत्रपतिके बेटे अंशुल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका मानना है कि हरियाणा सरकार राम रहीम को लगातार छूट दे रही है। अंशुल के पिता की हत्या के मामले में राम रहीम को उम्रकैद की सजा हुई थी।
अंशुल ने सवाल किया है कि अगर सरकार को उन पर इतनी दया आती है तो उन्हें सीधे रिहा क्यों नहीं कर देती। पीड़ित परिवार को डर है कि जेल से बाहर रहकर राम रहीम गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। अभी भी उनके खिलाफ कई मामले अदालत में लंबित हैं।
हरियाणा में अन्य कैदियों की स्थिति
हरियाणाकी जेलों में इस समय 2824 कैदी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। इनमें से अधिकांश को इतनी लंबी और बार-बार की छुट्टियां नहीं मिलतीं। राज्य सरकार का दावा है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। लेकिन आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां करते हैं।
राम रहीम का मामला इस मामले में अद्वितीय प्रतीत होता है। देश की अन्य जेलों में भी ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता। संजय दत्त ने अपनी पूरी सजा के दौरान केवल 160 दिन ही बाहर बिताए थे। मनु शर्मा के मामले में भी पैरोल को लेकर सख्ती बरती गई थी।
प्रशासन का रुख और सफाई
हरियाणासरकार ने इस मामले में खुद को पूरी तरह से क्लीन बताया है। प्रशासन का कहना है कि पैरोल देना एक नियमित प्रक्रिया है। राम रहीम ने अपने अच्छे आचरण के आधार पर छुट्टी के लिए आवेदन किया था। जिला प्रशासन ने नियमों के तहत ही उसे मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस मामले में कोई टिप्पणी करने से परहेज किया है। उन्होंने केवल धन्यवाद कहकर अपनी प्रतिक्रिया सीमित कर दी। विपक्षी दल लगातार इस मामले को उठा रहे हैं। वे इसे सरकार की कथित तुष्टीकरण नीति बता रहे हैं।
तुलनात्मक रूप से अन्य मामले
बिल्किस बानोमामले के दोषियों को भी लंबी पैरोल मिली थी। दिसंबर 2022 में दायर एक हलफनामे में बताया गया था कि ग्यारह दोषियों में से दस को सजा के बाद एक हजार दिन से अधिक की छुट्टी मिल चुकी थी। लेकिन राम रहीम का मामला अभी भी अद्वितीय बना हुआ है।
कम समय में अधिकतम छुट्टी का यह रिकॉर्ड देश में कहीं और नहीं देखा गया। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि पैरोल व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। सजा का उद्देश्य सुधार और दंड दोनों है। लेकिन बार-बार की छुट्टियां इस उद्देश्य को कमजोर करती हैं।
सामाजिक प्रतिक्रिया और बहस
इस मामलेने सामाजिक माध्यमों पर गर्म बहस छेड़ दी है। नागरिक समाज के सदस्य न्याय प्रणाली में विश्वास को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका सवाल है कि क्या सजा का मतलब केवल कागज पर सजा का आदेश होता है। क्या व्यवहार में इसका पालन नहीं होना चाहिए।
कई लोग इसे संवैधानिक मूल्यों के लिए चुनौती मान रहे हैं। उनका तर्क है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए। किसी के प्रभाव या हैसियत के आधार पर विशेष व्यवहार नहीं होना चाहिए। यह बहस अब राष्ट्रीय स्तर पर फैल गई है।
