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हरियाणा 112: आपातकालीन सेवाओं में बड़ी क्रांति, 9 मिनट में पहुंचती है मदद

Emergency services, Haryana 112

HARYANA NEWS: राज्य की आपातकालीन सेवाओं ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। हरियाणा 112 की इमर्जेंसी रिस्पांस सर्विस ने चार साल में 2.75 करोड़ कॉल संभाली हैं। सेवा की लोकप्रियता और विश्वसनीयता बढ़ी है। नागरिक अब हर आपात स्थिति में 112 को ही डायल करते हैं। प्रतिक्रिया समय भी घटकर नौ मिनट रह गया है। यह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार है।

पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने इस उपलब्धि की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सेवा ने जनता का भरोसा जीता है। चार वर्षों में औसत रेस्पॉन्स टाइम 16 मिनट से घटकर 9 मिनट 33 सेकंड हो गया। यह सुधार विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय का नतीजा है। इसमें पुलिस, स्वास्थ्य और फायर सेवाएं शामिल हैं।

आपातकालीन सेवाओं में तेजी और तकनीक

तेज प्रतिक्रिया के लिए राज्यभर में ईआरवी तैनात की गई हैं। जीपीएस ट्रैकिंग और डिस्पैच सिस्टम को अपग्रेड किया गया है। सभी महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। अब पुलिस, फायर, एम्बुलेंस या साइबर अपराध के लिए अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं। नागरिक सिर्फ 112 डायल कर सकते हैं।

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नागरिक संतुष्टि दर 92.60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा सेवा की गुणवत्ता को दर्शाता है। एडीजीपी हरदीप दून का कहना है कि और सुधार जारी हैं। आने वाले समय में प्रतिक्रिया समय को और कम करने का लक्ष्य है। ताकि ‘गोल्डन मिनट्स’ में ही मदद पहुंचाई जा सके।

भविष्य की योजनाएं और तकनीकी उन्नयन

वर्ष 2026 के लिए सेवा को और अधिक उन्नत बनाने का विजन है। पूरी तरह ऑटो डिस्पैच आधारित और एआई संचालित सिस्टम लागू किया जाएगा। रियल-टाइम मॉनिटरिंग को बढ़ाया जाएगा। निजी एम्बुलेंस को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से सेवा पहुंचेगी।

पंचकूला जिले में पहले से ही एक पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। इसमें ऑटो डिस्पैच सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। एसओएस कॉल मिलते ही सिस्टम स्वचालित रूप से नजदीकी ईआरवी भेज देता है। इसकी सफलता के बाद इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

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निगरानी और प्रदर्शन मूल्यांकन

जीपीएस आधारित ऑडिट मॉड्यूल एक महत्वपूर्ण नवाचार है। यह हर घटना के बाद वाहन के प्रदर्शन का विश्लेषण करता है। वाहन की गति, प्रतिक्रिया समय और दूरी जैसे पैमाने देखे जाते हैं। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। सेवा की दक्षता में सुधार के लिए यह डेटा उपयोगी है।

निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस को भी 112 सिस्टम में शामिल किया गया है। पार्क हॉस्पिटल ग्रुप की पांच एम्बुलेंस पहले से ही काम कर रही हैं। इससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल रही है। यह सार्वजनिक-निजी साझेदारी का एक सफल मॉडल बन रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार जारी रहा तो हरियाणा 112 देश का अग्रणी मॉडल बन जाएगा। एकीकृत हेल्पलाइन से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। सुरक्षा और राहत सेवाओं में यह मील का पत्थर साबित हो रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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