Rajasthan News: मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास की गवाह हल्दीघाटी की बदहाली पर राजस्थान हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ऐतिहासिक स्थलों के ‘पिकनिक स्पॉट’ बनने पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही और कर्तव्य की उपेक्षा माना है। दरअसल, कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए पाया कि हल्दीघाटी और रक्त तलाई जैसे पवित्र स्थल आज अतिक्रमण और गंदगी का शिकार हो चुके हैं।
वीरों की भूमि पर शराब और गंदगी
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जिस मिट्टी में महाराणा प्रताप के शौर्य की गाथा छिपी है, वहां आज शराब की बोतलें बिखरी हैं। याचिका में खुलासा हुआ कि ‘रक्त तलाई’ जैसा ऐतिहासिक मैदान अब गलत गतिविधियों का केंद्र बन गया है। जहां कभी वीरों के खून से जमीन लाल हुई थी, वहां आज दिन में प्रेमी जोड़े और रात में नशेड़ी डेरा जमाए रहते हैं।
हाई कोर्ट का अल्टीमेटम: 15 दिन में सफाई करो
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने प्रशासन को तुरंत एक्शन लेने के कड़े निर्देश दिए हैं।
- कोर्ट की इजाजत के बिना इन इलाकों में किसी भी नए निर्माण पर तुरंत रोक लगा दी गई है।
- प्रशासन को 15 दिनों के भीतर कचरा और झाड़ियां हटाने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाने का आदेश मिला है।
- इन ऐतिहासिक स्थलों की पवित्रता बचाने के लिए 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे।
- गंदगी फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और पार्किंग को ढलानों से हटाने का भी निर्देश दिया गया है।
100 करोड़ के प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
हाई कोर्ट ने खुले सीवेज और अवैध निर्माण को लेकर अधिकारियों की क्लास लगाई। कोर्ट ने पूछा कि 2024 के बजट में घोषित 100 करोड़ रुपये का ‘महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट’ प्लान अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतरा? कोर्ट ने कहा कि सड़क चौड़ी करने के नाम पर पहाड़ियों को काटना संविधान के नियमों का उल्लंघन है।
28 जनवरी तक देनी होगी रिपोर्ट
कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और पुरातत्व विभाग (ASI) को नोटिस जारी किया है। सभी को 28 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। अधिवक्ता निखिल भंडारी ने इसे ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने वाला बड़ा फैसला बताया है। बता दें कि 1576 में इसी हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप ने मुगलों से लोहा लिया था। कोर्ट की इस सख्ती से अब इस धरोहर के अच्छे दिन लौटने की उम्मीद जागी है।
