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1 फरवरी से बदल जाएंगे गुटखा-सिगरेट के नियम, फैक्ट्री में लगेंगे CCTV, हिला देगी ये GST News

New Delhi News: नए साल के पहले महीने के बाद यानी 1 फरवरी से तंबाकू और गुटखा बनाने वाली कंपनियों के लिए नियम बदलने वाले हैं। सरकार ने इन कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए GST News के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। अब गुटखा, जर्दा और तंबाकू निर्माताओं को अपनी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इन कैमरों की फुटेज को कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

हर मशीन का देना होगा पूरा हिसाब

सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, निर्माताओं को उत्पाद शुल्क अधिकारियों को अपनी मशीनों की कुल संख्या और उनकी क्षमता की जानकारी देनी होगी। यह नियम उन कंपनियों पर लागू होगा जो पाउच में सामान पैक करती हैं। अगर कोई मशीन लगातार 15 दिनों तक बंद रहती है, तो कंपनी उत्पाद शुल्क में छूट मांग सकती है। टिन में पैकिंग करने वालों को मूल्यांकन मूल्य पर टैक्स देना होगा।

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सिगरेट और गुटखा पर बढ़ेगा टैक्स

आम जनता के लिए GST News में सबसे बड़ी खबर यह है कि तंबाकू उत्पाद महंगे होने वाले हैं। सरकार ने 1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी के अलावा अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का ऐलान किया है। गुटखा पर 91 प्रतिशत, चबाने वाले तंबाकू पर 82 प्रतिशत और जर्दा पर भी 82 प्रतिशत अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगेगा। सिगरेट की बात करें तो इसकी लंबाई और फिल्टर के आधार पर प्रति 1000 स्टिक पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक टैक्स लगाया जाएगा।

पान मसाला पर लगेगा स्वास्थ्य सेस

सरकार ने मौजूदा जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (Cess) को हटाकर उसकी जगह नए नियम लागू किए हैं। अब पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर ‘स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर’ लगेगा। बीड़ी के मामले में यह 18 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर अलग से लगेगा। पान मसाला उत्पादन इकाइयों की क्षमता के आधार पर स्वास्थ्य उपकर वसूला जाएगा। इस पैसे का इस्तेमाल राज्यों में स्वास्थ्य योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

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विश्व बैंक की रिपोर्ट और टैक्स का गणित

जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से पिछले सात सालों में सिगरेट पर टैक्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। विश्व बैंक के अनुसार, भारत में अभी सिगरेट पर कुल टैक्स खुदरा मूल्य का करीब 53 प्रतिशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश है कि तंबाकू की खपत कम करने के लिए यह टैक्स 75 प्रतिशत या उससे अधिक होना चाहिए। इसी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि हानिकारक उत्पादों की कीमतें बढ़ें और लोग इनका इस्तेमाल कम करें।

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