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गुरुग्राम हत्या कांड: दोस्ती का झांसा देकर बेरहमी से मारा गया युवक, जेब के बिल से खुला राज

Haryana News: एक दोस्त की पैसे की लालच ने एक युवक की जान ले ली। गुरुग्राम के सेक्टर 37 में एक जंगल से मिले सड़े-गले शव की पहचान का एकमात्र सुराग उसकी जेब में मिला एक कुली का बिल था। इस बिल ने न सिर्फ मृतक फैसल इदरीसी की पहचान कराई, बल्कि पुलिस को हत्यारे दोस्त सतीश तिवारी तक पहुंचने का रास्ता भी दिखाया।

शव मिलने के बाद पुलिस ने जेब तलाशी में एक पर्ची पाई। उस पर एक मोबाइल नंबर लिखा था। यह नंबर कानपुर के मीरपुर कैंटोनमेंट के फैसल इदरीसी से जुड़ा था। फैसल का परिवार शव पहचानने गुरुग्राम आया। उन्होंने फैसल की पत्नी और उसके मामा पर शक जताया।

पुलिस ने जांच की दिशा बदली। फैसल के बैंक खाते में हालिया लेनदेन देखे गए। 25 दिसंबर के बाद खाते की गतिविधि रुक गई थी। 26 दिसंबर को पांच हजार रुपये की निकासी हुई, जो असामान्य थी। यह पैसा किसने निकाला, यह सवाल अहम हो गया।

मोबाइल कॉल डिटेल्स से हत्यारे का पता चला

पुलिस ने फैसल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स मंगाई। पता चला कि 24 दिसंबर को उसने रायबरेली के सतीश तिवारी से कई बार बात की थी। सतीश का फोन 26 दिसंबर से बंद मिला। उसकी गतिविधियां संदेह पैदा कर रही थीं। पुलिस ने बैंक स्टेटमेंट में छोटे लेनदेन पर गौर किया।

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24 दिसंबर को फैसल के खाते से 110 रुपये के चार भुगतान हुए थे। इनकी लोकेशन सेक्टर 37 की एक वाइन शॉप थी। पुलिस ने शॉप का सीसीटीवी फुटेज चेक किया। फुटेज में फैसल एक साथी के साथ मोटरसाइकिल पर आता+जाता दिखा। उसका साथी ही संदिग्ध था।

सीसीटीवी और तकनीकी जांच ने पकड़वाया हत्यारे को

हत्या की जगह वाइन शॉप से महज सौ मीटर दूर थी। पुलिस को यकीन हो गया कि फुटेज वाला साथी ही अपराधी है। सतीश के फोन के आईएमईआई से एक नया नंबर मिला। उस नंबर के सीडीआर से सतीश की पत्नी और साले का पता चला। इससे आरोपी का ठिकाना सामने आया।

पुलिस ने सरस्वती एन्क्लेव और हिमगिरी चौक के पास छापेमारी की। आरोपी सतीश तिवारी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह और फैसल डिलीवरी बॉय का काम करते थे और दोस्त थे।

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सतीश को पैसों की जरूरत थी। फैसल ने उसे लोन दिलाने का लालच दिया। इसके बदले में फैसल ने पंद्रह हजार रुपये मांगे। सतीश ने पत्नी की बालियां गिरवी रखकर यह पैसा फैसल को दिया। लेकिन लोन नहीं मिला। इसके बाद सतीश ने पैसे वापस मांगे।

पैसे वापस न मिलने पर सतीश ने साजिश रची। 24 दिसंबर को उसने फैसल को वाइन शॉप पर बुलाया। दोनों ने शराब पी। इसी दौरान सतीश ने फैसल की हत्या कर दी। उसने शव के हाथ-पैर बांधे और झाड़ियों में छिपा दिया। फिर वह फरार हो गया।

गिरफ्तारी के बाद सतीश ने अपना अपराध स्वीकार किया है। उसने बताया कि हत्या के बाद उसने फैसल के एटीएम कार्ड से पांच हजार रुपये भी निकाले थे। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस गुरुग्राम हत्या कांड में पुलिस की जांच तेज थी। तकनीकी सबूतों और सीसीटीवी फुटेज ने केस सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। एक छोटे से बिल ने बड़े रहस्य को सामने ला दिया। यह मामला दोस्ती में धोखे और लालच का है।

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