बड़ी कार्यवाही; पिछले वित्त वर्ष में पकड़ी गई 35 हजार करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी

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कर चोरी के खिलाफ एक साल लंबे अभियान में 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की जीएसटी धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया गया है। सीबआईसी के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर धोखाधड़ी वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत दिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्रावधान का दुरुपयोग कर अंजाम दी गई।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने मंगलवार को बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान सीजीएसटी के सभी जोन और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की टीमों ने फर्जी आईटीसी के जरिये 35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कर चोरी के करीब 8000 मामले दर्ज किए और इनमें 426 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए लोगों में 14 चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकालत जैसे पेशेवर भी शामिल हैं, जो इस कर चोरी को करने में मदद कर रहे थे।

सीबीआईसी के मुताबिक, आईटीसी के जरिये कर चोरी करने वालों को तलाशने के लिए जीएसटी व्यवस्था की शुरुआत से ही निगरानी की जा रही है, लेकिन ऐसे मामलों की बड़ी संख्या होने का अनुमान मिलने पर पिछले साल 9 नवंबर से एक विशेष राष्ट्रीय स्तर का अभियान शुरू किया गया था, जो अब भी चल रहा है। इस अभियान में फर्जी आईटीसी दावों की छानबीन कर उन्हें सामने लाया जा रहा है। सीबीआईसी के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में भी अब तक 500 से ज्यादा जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले पकड़े जा चुके हैं। करीब 1200 कंपनियों से जुड़े इन मामलों में 24 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था
बता दें कि जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी प्रावधान के तहत कंपनियां अपने उत्पादन पर वसूला गया कर जमा कराते समय उत्पादन के लिए खरीदे गए कच्चे माल पर चुकाए कर को घटा सकती हैं। कंपनियों पर कर का बोझ घटाने के लिए रखी गई इस व्यवस्था का कुछ लोग कच्चे माल के झूठे इनवॉयस बनाकर आईटीसी दावा करने के जरिये कर चोरी करने के लिए दुरुपयोग कर रहे हैं।

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