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ग्रीनलैंड: अमेरिका में तेज हुई 51वें राज्य बनाने की मांग, सांसद ने पेश किया ऐतिहासिक बिल

World News: अमेरिका में ग्रीनलैंड को अपना 51वां राज्य बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को एक विधेयक पेश किया। इस बिल का लक्ष्य ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र में शामिल करने का रास्ता साफ करना है। यह कदम तब उठाया गया है जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस क्षेत्र में दिलचस्पी जता चुके हैं।

सांसद फाइन के विधेयक में राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। फाइन ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड महज एक दूरस्थ चौकी नहीं है। यह एक रणनीतिक संपत्ति है।

आर्कटिक पर नियंत्रण की जद्दोजहद

फाइन के अनुसार जो ग्रीनलैंड को नियंत्रित करता है वही प्रमुख आर्कटिक शिपिंग लेन और सुरक्षा ढांचे पर नियंत्रण रखता है। अमेरिका भविष्य को ऐसे शासन के हाथों में नहीं छोड़ सकता जो उसके मूल्यों के लिए खतरा हो। उनकी दलील आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर आधारित है।

आर्कटिक में बर्फ पिघलने से नए समुद्री व्यापार मार्ग खुल रहे हैं। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे इन मार्गों पर नियंत्रण के लिए अहम बनाती है। इसके अलावा यहां खनिज संसाधन और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार होने का अनुमान है। अमेरिका इन संसाधनों तक पहुंच चाहता है।

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डेनमार्क के साथ कूटनीतिक चुनौती

ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। डेनमार्क खुद नाटो का प्रमुख सहयोगी देश है। अमेरिकी प्रस्ताव से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो सकता है। इसी सप्ताह अमेरिकी सांसदों का एक दल कोपेनहेगन जा रहा है।

इस प्रतिनिधिमंडल का मकसद दोनों देशों के बीच एकता प्रदर्शित करना है। वे कूटनीतिक संवाद को बनाए रखना चाहते हैं। उनका प्रयास है कि ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी से आपसी विश्वास कम न हो। डेनमार्क ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।

ट्रंप की दिलचस्पी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ग्रीनलैंड में दिलचस्पी जताई थी। उनके प्रशासन ने इस क्षेत्र को खरीदने की संभावना तलाशी थी। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नजर डाली है। अमेरिका ने 1946 में डेनमार्क से इसे खरीदने का प्रस्ताव रखा था।

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अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में थुले एयर बेस संचालित करता है। यह बेस उत्तरी अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस कमांड का हिस्सा है। नया विधेयक इस सैन्य उपस्थिति को और विस्तार देने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इससे अमेरिकी रणनीतिक पहुंच मजबूत होगी।

कानूनी और राजनीतिक बाधाएं

किसी विदेशी क्षेत्र को अमेरिकी राज्य बनाना बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी जरूरी है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की स्थानीय सरकार की सहमति भी अनिवार्य होगी। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना एक बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल यह विधेयक शुरुआती चरण में है। इसे कानून बनने के लिए भारी राजनीतिक समर्थन चाहिए। अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय सहमति बनाना आसान नहीं होगा। विदेश नीति पर बहस तेज होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

ग्रीनलैंड की स्थानीय आबादी की राय सबसे महत्वपूर्ण है। उनकी स्वायत्त सरकार ने खुद को बेचे जाने के विचार को खारिज किया है। किसी भी सौदे के लिए उनकी सहमति बुनियादी शर्त होगी। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।

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