International News: ग्रीनलैंड के बर्फीले रेगिस्तान में एक ऐसी फौज तैनात है, जिसे दुनिया अक्सर नजरअंदाज कर देती है। लेकिन यह एलीट यूनिट दुश्मनों के लिए काल के समान है। यह डेनमार्क नौसेना की खास ‘डॉग स्लेज यूनिट’ है। यह यूनिट आर्कटिक की जानलेवा ठंड में भी ऑपरेशन को अंजाम देती है। हाल ही में अमेरिकी चर्चाओं के बीच इस यूनिट की ताकत फिर सुर्खियों में है।
जन्मजात शिकारी और खतरनाक ट्रेनिंग
इन कुत्तों का शरीर आर्कटिक के बेरहम मौसम के लिए ही बना है। इनका स्वभाव बेहद फुर्तीला और आक्रामक होता है। इनकी सूंघने की शक्ति इतनी तेज है कि ये बर्फ के नीचे छिपे दुश्मन को भी खोज निकालते हैं। सेना इन्हें हाई लेवल की ट्रेनिंग देती है। ये कुत्ते मुश्किल से मुश्किल हालात में गश्त और जासूसी करते हैं। फिलहाल ये तीन समूहों में बंटकर ग्रीनलैंड के उत्तर-पूर्वी तट की सुरक्षा कर रहे हैं।
हिटलर को रोकने के लिए बनी थी फौज
इस यूनिट का इतिहास दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ा है। इसका गठन हिटलर की नाजी सेना को ग्रीनलैंड में घुसने से रोकने के लिए किया गया था। युद्ध के बाद इसे कुछ समय के लिए भंग कर दिया गया। हालांकि, 1950 में शीत युद्ध के दौरान रूस के खतरे को देखते हुए इसे फिर एक्टिव किया गया। आज इसे ‘सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल’ के नाम से जाना जाता है।
-55 डिग्री में भी नहीं रुकते कदम
ग्रीनलैंड में तापमान माइनस 55 डिग्री तक गिर जाता है। वहां महीनों तक सूरज नहीं निकलता। ऐसे हालात में इंसानी सेना का काम करना नामुमकिन होता है। लेकिन ये जांबाज कुत्ते लगातार पांच महीने तक लंबे मिशन पर रह सकते हैं। ये न केवल दुश्मन को ट्रैक करते हैं, बल्कि सैनिकों के लिए एक चेतावनी सिस्टम की तरह काम करते हैं।
ड्रोन और सैटेलाइट भी इनके आगे फेल
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बयान दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप को इस खतरनाक डॉग यूनिट के बारे में बताया था। ये कुत्ते उन जगहों पर भी मिशन पूरा कर सकते हैं, जहां हाईटेक ड्रोन और सैटेलाइट फेल हो जाते हैं। अगर कभी अमेरिकी सेना ने यहां घुसने की कोशिश की, तो उन्हें सबसे पहले इस ‘चौपाया सेना’ का सामना करना पड़ेगा।

