Right News

We Know, You Deserve the Truth…

प्रदेश की जनता को लूटने के जगह सहायता देना शुरू करे सरकार- सुरेश कुमार, राइट फाउंडेशन

हिमाचल में कोरोना के हालात बेहद चिंताजनक होते जा रहे है। अब गरीब छोड़ो, लगभग सभी मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों के पास भी खाने पीने तक के साधन शेष नही बचे है। आम जनता मदद के लिए प्रशासन और सरकार की ओर आस भरी नजरों से देखने लगी है और उधर सरकार में बैठे नेताओं ने कोरोना संक्रमण के फैलने के लिए आम जनता को दोषी ठहराना शुरू कर दिया है। जबकि सभी को पता है कि पिछले नगर निकाय के चुनावों की शुरुआत के समय प्रदेश भर में कोरोना के केस 300 के आस पास बचे थे। जोकि 37 दिनों के चुनाव प्रचार के बाद 2000 प्रतिदिन तक बढ़े थे। इन नगर निकायों चुनावों में बड़े बड़े स्टार प्रचारकों ने खुल कर कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाई थी। जिसका नतीजा है कि आज प्रतिदिन हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमित सामने आ रहे है।

राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने इस मामले में सरकार, प्रशासन और पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज प्रदेश में कोरोना के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार, प्रशासन और पुलिस मुख्य रूप से जिमेवार है। अगर सरकार में बैठे नेता अच्छी योजना बनाते, प्रशासन उनको लागू करता और पुलिस जुर्माने के नाम पर लूटने की जगह सख्ती से लॉकडाउन का पालन करवाती तो कोरोना कब का खत्म हो चुका होता। उन्होंने कोरोना संक्रमण के फैलाव के लिए नेताओं को जिमेवार ठहराते हुए कहा कि नेता कोरोना नियमों के अंदर चुनाव प्रचार करते तो इतने बुरे हालात नही होते। उन्होंने कहा कि आज कोरोना से प्रदेश भर में जितनी भी मौते हो रही है, उसके लिए प्रदेश के नेता अप्रत्यक्ष रूप से जिमेवार है।

उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे नेताओं और उनके सलाहकारों के पास योजनाओं और विज़न की कमी है। अगर सही समय पर सही फैसले लिए गए होते तो हिमाचल में कोरोना प्रवेश नही करता। सरकार और उसके सलाहकारों की कमी का नतीजा आज पूरा प्रदेश भुगत रहा है। आज प्रदेश का गरीब वर्ग मजबूरी में सड़कों पर आ चुका है और सरकार में बैठे नेता अपनी मस्ती में है। गरीबों की हालत दयनीय हो चुकी है, वह घर में रहे तो भूखे मरेंगे, बाहर गए तो पुलिस के डंडे पड़ेंगे। यह सरकार और प्रशासन का प्रदेश की जनता के साथ जानबूझ कर किया जा रहा अन्याय है।

कोरोना में वसूले जुर्माने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से सरकार का लूट कार्यक्रम जारी है। प्रदेश के गरीबों से करोड़ों रुपया मास्क, कर्फ्यू और महामारी के नाम पर पुलिस विभाग द्वारा वसूला जा चुका है। लेकिन नेता जब बिना मास्क घूमते है, रैलियां करते है तो वहां सारे नियम ताक पर रख दिए जाते है। आम जनता को लूटने और कूटने वाली पुलिस कानून का पालन करवाने में असफल नजर आती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि करोड़ों वसूलने के बाबजूद सरकार द्वारा कानूनी लूट जारी है और अब तक आम जनता को दी जा रही सहायता जीरो है। जबकि सरकार और पुलिस को अपनी छवि सुधारने के लिए गरीबों को उस लूट के खजाने से मुफ्त मास्क और उपचार दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोरोना फैलने और कानूनी लूट में सबसे बड़ी कमी प्रदेश सरकार में बैठे नेताओं और उनके सलाहकारों की है। जो सही समय पर सही निर्णय नही ले पाते और उसका खामियाजा प्रदेश की गरीब जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आवाहन की कि इस महामारी काल में पाँच किलो राशन से गरीब परिवारों का कोई भला नही होने वाला। सरकार को चाहिए कि वह गरीबों को सही राशन मुहैया करवाए। ऐसे पांच किलो राशन देकर आम जनता को ठगना बंद करे। प्रदेश की जनता को मुफ्त राशन और स्वास्थ्य सेवा दे, ताकि हर अनमोल जिंदगी को बचाया जा सके।

उन्होंने सरकार में बैठे नेताओं और उनके सलाहकारों को सलाह देते हुए कहा कि अगर आपको समझ नही आता तो प्रदेश के बुद्धिजीवी वर्ग की सलाह ले। प्रदेश की जनता को सताना बंद करो। उनको उनके संवैधानिक अधिकारों के अनुसार सुविधाएं दो। आम जनता की समस्याओं पर काम करो। ताकि स्थिति संभले और आम जनता को राहत मिल सके।

error: Content is protected !!