जिला कांग्रेस महासचिव संदीप सांख्यान ने जिला बिलासपुर में निजी बसों के पहिए थमने की बात की है। उन्होंने कहा कि अकेले जिला बिलासपुर में निजी बसों के 305 रूट हैं और सरकार गलत फैसले और समयानुसार फैसला न लेने की वजह से निजी बसों के ऑपरेटरों की समस्याएं बढ़ती जा रही है। इस मसले को पिछले वर्ष भी उठाया गया था, यह सबको पता है कि कोविड 19 की वजह से हालत विपरीत हैं लेकिन निजी बसों का टैक्स तो माफ नहीं किया ही जा सका है।

उन्होंने कहा कि पहले तो एक निजी बस ऑपरेटर शुरुआती समय में बेरोजगारी के दौर से गुजरता है उसके बाद निजी बस चलाने हेतू रूट परमिट लेते ही थक जाता है, फिर कुछ मार्जिन मनी लेकर वित्तिय संस्थानों या फिर बैंकों से भारी ब्याज की दरों पर लोन लेता है तदुपरांत बसों में ग्राहक या सवारियों से पैसा कमा कर परिवार पालता है साथ मे दो-तीन लोंगो को रोजगार भी मुहैया करवाता और बैंक का भारी भरकम लोन भी चुकता करने के लिए तैयार रहता है, क्योंकि बैंकों का पैसा तो पब्लिक मनी है और ऊपर से डीजल की कीमतें, इंसोरेंस और स्पेयर पार्ट्स का महंगा होना बड़ा सवाल है। ऐसे में निजी बसों के पहिए थम रहे हैं और सरकार कोविड 19 की वजह से इन निजी बसों से वसूले जाने वाले करों में छूट नहीं दे रही हो तो इनका अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाना लाज़मी है और नुकसान तो आम जन का ही होगा। कोविड 19 के हालत के चलते पहले कोई सवारी घर से निकलने वाली ही नहीं और ऐसे में यदि निजी बस ऑपरेटरों को टैक्स में भी छूट नहीं दी जाए तो इनका लाखो-करोड़ो का व्यसाय और लोंगो को दी जाने वाली सुविधाओं से नुकसान हो सकता है। जबकि प्रदेश की सरकार बार-बार आश्वासन देने के बावजूद भी इस पर कोई फैसला नहीं ले रही है, हालांकि 25 मार्च 2021 को प्रधान सचिव परिवहन की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें फैसला लिया गया था कि अप्रैल माह की कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी. लेकिन अभी तक इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की गई और ना ही इस पर कोई फैसला हुआ है। इसलिए निजी बस ऑपरेटर अपनी बसें खड़ी करने को मजबूर हो चुके हैं। निजी बस ऑपरेटरों की संस्था का भी यही कहना है कि समय पर प्रदेश सरकार का फैसला न लेना इस व्यवसाय के लिए बहुत घातक है।

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