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वैक्सीन पर आंकड़ों के मायाजाल में जनता को उलझाने की कोशिश कर रही है सरकार – डॉ. तँवर

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टेलीविजन पर किये संबोधन को महिमामण्डित करने पर भाजपा नेताओं को लताड़ लगाते हुए कहा कि वैक्सीन को लेकर वे जनता को गुमराह करने स्व परहेज़ करें।

सीपीआई (एम) की ओर से जारी प्रैस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री सहित उनकी पार्टी और भाजपा सरकारें वास्तविक टीकाकरण की संख्या बताने के बजाय जनता को आंकड़ों के मायाजाल में उलझा रही हैं। सीपीआई (एम) का कहना है कि प्रधानमंत्री और सरकार डोज़ की संख्या गिनने के बजाय जनता को ये बताए कि कितने लोग पूरी तरह से वैक्सीनेट हो चुके हैं क्योंकि अधूरी वैक्सीनेशन से न तो हर्ड इम्यूनिटी आ सकती है और न ही पूरी तरह सुरक्षा मिल सकती है।

सीपीआई (एम) राज्य सचिवमण्डल सदस्य डॉ. कुलदीप सिंह तँवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अभी मात्र एक तिहाई आबादी को ही वैक्सीन की पहली डोज़ लगी है जबकि 72 लाख की आबादी में केवल 4 लाख 35 हज़ार को ही दो डोज़ लग पाई हैं जो प्रदेश की कुल आबादी का 6 प्रतिशत ही होता है। वहीं 18 से 44 साल की आबादी में केवल 3 प्रतिशत को ही पहली डोज़ लगी है और उसमें भी अधिकांश हिस्सा शहरी है।

डॉ. तँवर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों तक अभी भी टीकाकरण की पहुंच नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि सीपीआई (एम) पहले भी यह मांग कर चुकी है कि वैक्सीन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और स्लॉट बुक करने की प्रक्रिया को बदला जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रणाली से प्रदेश के ग्रामीण युवा टीकाकरण से वंचित हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे अगर बदलाव न किया गया।

माकपा नेता ने कहा कि लॉकडाउन खुलने के बाद किसान और मजदूर वर्ग कृषि-बागवानी और मज़दूरी के काम में लग जाएंगे और जोखिम बढ़ जाएगा। ऐसे में ज़रूरी है कि उनका टीकाकरण प्राथमिकता के आधार पर हो।

वहीं माकपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मुफ्त टीकाकरण की घोषणा करके जनता पर कोई अहसान नहीं कर रहे। ऐतिहासिक तौर पर टीकाकरण के लिए हमेशा केन्द्र सरकारें ही आर्थिक सहायता देती आई हैं। जबकि इस बार कोविड के लिए तो जनता के हर तबके ने केन्द्र और राज्य सरकारों के ख़ज़ाने में आर्थिक सहयोग भी किया है।

सीपीआई (एम) ने सरकार के दोहरे चरित्र की भी निंदा की। पार्टी का कहना है कि एक ओर प्रधानमंत्री मुफ्त टीकाकरण की घोषणा करते हैं तो दूसरी तरफ निजी अस्पतालों को टीका लगाने की छूट देते हैं। सरकार के पास टीके हैं नहीं तो लोग जान के भय से निजी अस्पतालों में ही जाएंगे। टीके की अनुपलब्धता और मुफ्त टीकाकरण की घोषणा और उस पर निजी अस्पतालों को टीका लगाने की छूट सरकार के दोगले चरित्र को उजागर करती है। यहां तक कि सरकार ने वैक्सीन पर भी जीएसटी में छूट नहीं दी।

सीपीआई (एम) ने कहा कि डबल इंजन की सरकार के दोनों इंजन हाँप रहे हैं और भाजपा नेता बयानों की फूंक मारकर उन्हें गति देने की कोशिश में लगे हुए हैं। सीपीआई (एम) ने कहा कि सरकार और भाजपा नेता जनता को उलझाने के बजाए सच्चाई का सामना करें।


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