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नौजवान सभा की ओर से महेन्द्र राणा ने की मनरेगा मजदूरों को चार हजार प्रतिमाह देने की मांग

कोरोना के कारण प्रदेश में लोगों के हालात बद से बदतर होने लगे है। खास कर मजदूर वर्ग के पास संसाधन खत्म होते जा रहे है, कमाना तो दूर उनके पास खाने तक के लिए पैसे नही बचे है। सरकार ने कोरोना कर्फ्यू लगा कर अपनी एक जिमेदारी को पूरा किया लेकिन दूसरी जिमेवारी को पूरा करने से मुंह मोड़ती नजर आ रही है। इसी दूसरी जिमेदारी को याद दिलाने के लिए आज जनवादी नौजवान सभा की क्षेत्रीय कमेटी बालीचौकी के अध्यक्ष महेंद्र राणा ने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा और मांग की कि हिमाचल के मजदूरों को आर्थिक सहायता दी जाए।

मांग पत्र में कहा गया कि प्रत्येक मनरेगा वर्कर के खाते में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाए। क्योंकि इस महामारी के दौर में मनरेगा का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। अधिकांश पंचायतें मनरेगा में कार्य देने में असफल हुई है। भारी वर्षा और ओलावृष्टि के कारण फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। प्रदेश सरकार 3 से 5 किलो राशन जो बीपीएल परिवार को दे रही है वह पर्याप्त नहीं है। क्योंकि बीपीएल का सर्वेक्षण 2002 में हुआ है, इसमें अधिकांश गांव के अमीर परिवार ही है ।

महेन्द्र राणा ने बताया कि उपरोक्त हालातों को ध्यान में रख कर कहा जा सकता है कि आम जनता का गुजर-बसर बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि नौजवान सभा प्रदेश सरकार से जोरदार मांग करती है कि इन तमाम तथ्य को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से ₹4000 प्रतिमाह मनरेगा मजदूरों के खाते में डाला जाए। उन्होंने कहा कि श्रमिक कल्याण बोर्ड के पास मजदूर गरीब मजदूरों का करोड़ों रुपए पड़ा हुआ है और इस विपदा के समय में इस पैसे की प्रत्येक परिवार को आवश्यकता है। इसलिए मुख्यमंत्री से आग्रह है कि प्रत्येक मनरेगा कामगार को श्रमिक कल्याण बोर्ड से ₹4000 प्रति माह खाते में दिया जाए।

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