शिमला में आरक्षण और एससी एसटी एक्ट के विरोध को खत्म करवाए सरकार- रवि कुमार दलित

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हिमाचल में जातिगत लड़ाई एक नए मोड़ पर आ गई है। कुछ स्वर्ण समाज के लोगों ने शिमला में स्वर्ण आयोग, आरक्षण ख़त्म करने और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की मांग को लेकर मोर्चा खोल रखा है वही अब अनुसूचित जाति वर्ग के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धरने पर बैठे लोगों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सर्व विदित है कि ना तो स्वर्ण समाज के लोग धरना शुरू करते और ना ही दलित समुदाय सर संबंधित लोग उनके विरोध में आते। हिमाचल का सौहार्दपूर्ण, भाईचारे और शांतिप्रिय वातावरण को बिगाड़ने में यह लड़ाई एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ताजा जानकारी के मुताबिक इस मामले में शिमला के प्रसिद्ध समाजसेवी रवि कुमार दलित ने इस मामले में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन दिया है तथा मांग की है कि दलित अधिकारों के विरूद्ध चल रहे इस धरने को तत्काल समाप्त किया जाए। ताकि हिमाचल में एकता और अखंडता बनी रहे।

ज्ञापन के माध्यम से रवि कुमार दलित ने मांग की है कि प्रदेश में कानून और संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने और कानून विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाने की विनम्र प्रार्थना की है। ताकि हिमाचल में समता, समानता और भ्रातृव की भावना बनी रहे।

उन्होंने कहा कि शिमला में अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में आरोपी, कानून विरोधी और संविधान विरोधी लोग भारतीय कानून और संवैधानिक व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन कर रहे है। उनका विशेष विरोध संविधान द्वारा प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से है। इस विरोध से यह लोग जानबूझ कर प्रदेश के दलित समाज को निशाना बना रहे है। जबकि यह दोनों संविधान द्वारा प्रदत्त कानून है और भारतीय कानून का विरोध देशद्रोह की श्रेणी का अपराध है।

सामाजिक कार्यकर्ता रवि कुमार ने अपने ज्ञापन में कई दलित अत्याचारों से संबंधित घटनाओं का भी जिक्र किया है। जिसमें प्रमुख रूप से दलित नेता केदार सिंह जिदान की हत्या, मनाली में वृद्ध दलित महिला को शमशान घाट में जलाने से रोकने, बिलासपुर में भी दलित मृतक को शमशान घाट में रोकने, दाड़लाघाट में दलितों की कारे जलाने, बंजार में देवता के कार्यक्रम में दलितों के साथ हुई मारपीट मामलों को प्रमुखता से उठाया है।

उन्होंने ज्ञापन में दलित, पिछड़ों और दबे कुचले लोगों पर हुए अत्याचार मामलों में आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी झूठ केसों में फंसाने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि यह लोग प्रदर्शन कर पुलिस को उनको झूठे केसों में फंसाने के लिए ज्ञापन या शिकायत पत्र भी देते है।

सामाजिक कार्यकर्ता रवि कुमार ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन के माध्यम से बताया कि इस कानून विरोधी आंदोलन के लगभग सभी मुखिया कहीं ना कहीं किसी ना किसी न्यायालय में अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में आरोपी है। क्योंकि यह लोग नही चाहते कि इनके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही हो, इसलिए यह लोग इस तरह की गैर कानूनी मांगे कर रहे है।

सामाजिक कार्यकर्ता रवि कुमार ने ज्ञापन में यह भी बताया कि हिमाचल के इतिहास में थोड़ा पीछे देखें तो आज से 2-3 साल पहले यहां जाति आधारित अत्याचार ना के बराबर थे। लेकिन जब से इन कानून और संविधान विरोधी लोगों ने सिर उठाया है, आरक्षण और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम का विरोध शुरू किया है। प्रदेश में कई लोगों का उत्साह बढ़ा है और जाति आधारित हिंसा, प्रताड़ना और शोषण के मामलों में वृद्धि दर्ज हुई है।

उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश से मांग की है कि हिमाचल में कानून और संविधान विरोधियों के धरने को तत्काल प्रभाव से बंद करवाया जाए तथा धरने में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कानूनी धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाए। ताकि हिमाचल प्रदेश के लोगों में संविधान के अनुसार समता, समानता और भ्रातृत्व का भाव बनी रहे।

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