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अध्यापक संघों और कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों का विरोध करने पर रोक

हिमाचल में आजकल एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है। अध्यापक संघ, संगठन और ग्रुप बना कर सरकार के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया है। जबकि सरकारी कर्मचारियों का सरकार का विरोध केंद्रीय सिविल सेवाएं (आचरण) अधिनियम 1964 का उल्लंघन है। इतना ही नही इस मामले में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।

ताजा जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा सरकार के निर्णय के विरूद्ध सोशल मीडिया पर लिखने के मामले में नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में उप निदेशकों, प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को सीधा और साफ आदेश दिया गया है कि वह समस्त अधीनस्थ कर्मचारियों को समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में दिए जा रहे सरकार विरोधी बयानों पर रोक लगाए। अगर कोई अध्यापक सरकार की नीतियों के खिलाफ लिखता या बोलता पाया गया तो उसके बारे रिपोर्ट बना कर अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए प्रेषित करने का भी आदेश दिया गया है।

नोटिस के मुताबिक ऐसे अध्यापकों के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1985 के तहत कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

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