सरकार ने लीगेसी योजना की अवधि 15 अप्रैल तक बढ़ा दी है। इससे उन व्यापारियों को राहत मिलेगी, जो वैट दे पाने में अभी भी सफल नहीं हुए हैं। इन्होेंने अपना वैट चुकता करना है, परंतु कर नहीं पा रहे। ऐसे में टैक्स बार एसोसिएशन के आग्रह पर सरकार ने योजना की अवधि को बढ़ा दिया है। लीगेसी योजना की अवधि बढ़ने से खजाने में करोड़ों की और रकम आने की उम्मीद है। योजना की अवधि बढ़ाने को लेकर सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। उल्लेखनीय है कि जीएसटी लागू होने से पहले प्रदेश में वैट के साथ-साथ सेंट्रल सेल्स टैक्स व अन्य करों के हजारों मामले लंबित हैं। इन मामलों में खजाने में करोड़ों की रकम आनी है। पुराने नियमों के तहत अर्थ दंड के साथ साथ वैट की वसूली पर ब्याज की दर बहुत अधिक होने की वजह से कारोबारी अथवा उद्योगपति भुगतान करने से गुरेज कर रहे थे। लिहाजा सरकार ने बीते साल लीगेसी योजना को लागू किया। योजना के लागू होने के बाद वैट व अन्य करों के भुगतान के पुराने मामलों का निपटारा करवाने वाले कारोबारियों को सिर्फ 10 फीसदी ब्याज ही देना पड़ रहा है। नतीजतन योजना लंबित भुगतान की वसूली के लिए कारगर साबित हो रही है।

आबकारी एवं कराधान विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक बीते साल जुलाई से दिसंबर तक इस योजना के तहत महज 73 करोड़ की रकम खजाने में जमा हुई। मगर इसके बाद के तीन महीनों में करीब 300 करोड़ की राशि खजाने में आई। बीते मार्च माह तक योजना के तहत खजाने में 362 करोड़ की रकम जमा हुई। मगर इस दौरान लीगेसी योजना की अवधि खत्म हो गई। लिहाजा प्रदेश की टैक्स बार ऐसोसिएशन ने सरकार से योजना की अवधि को बढ़ाने का आग्रह किया। बार के आग्रह के साथ साथ योजना के तहत करों के भुगतान के लंबित मामलों के निपटारे को लेकर कारोबारियों में देखे जा रहे उत्साह के चलते सरकार ने योजना की अवधि को 15 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। हालांकि विभाग का मानना है कि बार-बार इसकी अवधि को बढ़ाना ठीक नहीं है, क्योंकि कई व्यापारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इनको शर्त है कि उनको अपने मामले निपटाने के लिए अदालत से केस वापस लेने होंगे लिहाजा कई व्यापारियों ने कोर्ट को आवेदन भी कर रखे हैं, जहां से कोई निर्णय नहीं हुआ है। वहां से फैसला आने के बाद यहां तेजी के साथ लीगेसी स्कीम में मामले निपटा लिए जाएंगे लेकिन हो सकता है कि अवधि को कुछ और बढ़ाना पड़ जाए।

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