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ईरान में फंसे हजारों छात्रों के लिए आई ‘गुड न्यूज’, सांसें थामे बैठे मां-बाप का इंतजार होगा खत्म?

New Delhi News: ईरान (Iran) के तनावपूर्ण हालात के बीच एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। युद्ध जैसे माहौल में फंसे भारतीय छात्रों का पहला जत्था शुक्रवार को वतन लौट सकता है। भारत सरकार ने पहले ही अपने नागरिकों को सलाह दी थी कि वे ईरान के हालात को देखते हुए जल्द से जल्द वहां से निकल जाएं। अब हजारों परिवारों की उम्मीदें जाग उठी हैं, जो अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थे।

शुक्रवार से घर वापसी की उम्मीद

जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने गुरुवार को अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर ईरानी अधिकारियों से समय पर क्लीयरेंस मिल जाती है, तो छात्रों का पहला बैच शुक्रवार को भारत पहुंच सकता है। भारत ने ईरान में मौजूद छात्रों, तीर्थयात्रियों और कारोबारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि जो भी साधन मिले, उससे तुरंत देश छोड़ दें। एसोसिएशन के संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि शिराज और तेहरान की यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कई छात्रों ने अपने टिकट बुक कर लिए हैं।

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टिकट बुक, लेकिन रास्ता मुश्किल

ईरान ने अमेरिकी हमलों के डर से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था, जिसे अब फिर से खोल दिया गया है। खुएहामी के अनुसार, कई छात्रों से बात हुई है और वे लौटने को तैयार हैं। हालांकि, सब कुछ वहां के मौजूदा हालात और ईरानी सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। सुरक्षा जोखिमों और ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण छात्रों के लिए खुद एयरपोर्ट तक पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

खतरे में हजारों छात्रों की जान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समय हजारों भारतीय छात्र ईरान में फंसे हुए हैं। इनमें अकेले जम्मू और कश्मीर के करीब 2,000 मेडिकल छात्र शामिल हैं। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और उन पर हो रही हिंसक कार्रवाई ने हालात को और बिगाड़ दिया है। छात्र वहां के डर के माहौल से निकलकर अपने घर वापस आना चाहते हैं।

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पीएम मोदी से लगाई गुहार

बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारत में बैठे माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। छात्र संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से तत्काल मदद की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सरकार एक ठोस ‘इवैक्यूएशन फ्रेमवर्क’ तैयार करे। साथ ही एक इमरजेंसी हेल्पलाइन और सुरक्षित कॉरिडोर बनाया जाए, ताकि ईरान में फंसे भारतीय छात्र बिना किसी परेशानी और सम्मान के साथ अपने वतन लौट सकें।

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