Business News: कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी निवेशकों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बने हुए थे। जनवरी में कई निवेशकों ने अपने शेयर या फिक्स्ड डिपॉजिट से पैसा निकालकर गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में निवेश किया था। उम्मीद थी कि ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते सोने-चांदी के दाम आसमान छूएंगे। लेकिन निवेशकों की यह उम्मीद पूरी होने के बजाय उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
जनवरी से अब तक 40% तक गिरावट
निवेशकोंकी उम्मीदों के उलट, गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ ने जनवरी से अब तक 40 फीसदी तक का गोता लगा लिया है। निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ 360 रुपये से गिरकर 235 रुपये पर आ गया है। वहीं निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ 148 रुपये से लुढ़ककर 127 रुपये पर कारोबार कर रहा है। टाटा सिल्वर ईटीएफ 32%, आईसीआईसीआई सिल्वर ईटीएफ 35% और टाटा व आईसीआईसीआई गोल्ड ईटीएफ करीब 15% तक नीचे आ चुके हैं।
गिरावट के पीछे ये हैं 3 बड़े कारण
विशेषज्ञोंके मुताबिक, कई वजहों से सोने-चांदी में तेजी नहीं आ पाई और भारी गिरावट देखने को मिली:
- डॉलर में मजबूती: होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे महंगाई का खतरा बढ़ा और निवेशक सुरक्षित मुद्रा डॉलर की ओर आकर्षित हुए।
- फेडरल रिजर्व की नीति: अमेरिका में रेट कटौती की उम्मीद नहीं है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी के दामों पर पड़ रहा है।
- निवेशकों की बिकवाली: गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में तेजी रुकने के बाद निवेशक धीरे-धीरे बाहर निकल रहे हैं, जिससे ईटीएफ डिस्काउंट पर बिक रहे हैं।
रिकॉर्ड हाई से सोना-चांदी हुए इतने सस्ते
एमसीएक्स पर चांदीका रिकॉर्ड हाई 4.20 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 मार्च को चांदी 2.52 लाख रुपये और सोना 1.55 लाख रुपये पर है। यानी चांदी 1.68 लाख रुपये और सोना 38 हजार रुपये सस्ता हुआ है।
क्या है आगे की राह?
विशेषज्ञोंका अनुमान है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी आती है तो सोना-चांदी में तेजी आ सकती है। वहीं अगर अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है तो कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-इजरायल जंग खत्म होने के बाद सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा करेक्शन हो सकता है। हालांकि, कुछ का अनुमान है कि 2026 में सोना-चांदी 15-20% तक रिटर्न दे सकते हैं।


