Brussels News: अमेरिका और यूरोप के बीच जुबानी जंग अब व्यापार युद्ध में बदलती दिख रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अजीबोगरीब शर्त रख दी है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड (Greenland) खरीदने की इजाजत नहीं मिली, तो वे यूरोपीय देशों पर भारी टैक्स (Tariff) लगाएंगे. ट्रंप की इस धमकी ने यूरोपीय संघ (EU) की नींद उड़ा दी है. ईयू के शीर्ष नेताओं ने इसे “खतरनाक आर्थिक संकट” की शुरुआत बताया है. उनका मानना है कि यह कदम दुनिया को मंदी की ओर धकेल सकता है.
गरीबी और मंदी का बड़ा खतरा
यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक काजा कल्लास ने इस मुद्दे पर बेबाक राय रखी है. उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप की यह जिद अटलांटिक के दोनों किनारों पर गरीबी बढ़ाएगी. टैरिफ बढ़ने से सिर्फ यूरोप ही नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा. कल्लास ने कहा कि ऐसे झगड़ों का सीधा फायदा रूस और चीन जैसे देशों को मिलेगा. अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा का मुद्दा है, तो उसे नाटो (NATO) के जरिए सुलझाना चाहिए, न कि व्यापार युद्ध से. यह विवाद यूक्रेन युद्ध से भी ध्यान भटका सकता है.
यूरोप अपनी संप्रभुता पर नहीं झुकेगा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्रंप को कड़ा जवाब दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यूरोप अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह एकजुट है. ईयू परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी उनका समर्थन किया. दोनों नेताओं ने माना कि ट्रंप की टैरिफ नीति ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा कि हम किसी भी दबाव में नहीं आएंगे और इसके खिलाफ समन्वित कदम उठाएंगे.
क्या है ग्रीनलैंड विवाद?
यह विवाद नया नहीं है. साल 2019 में भी ट्रंप ने ग्रीनलैंड को “सामरिक रूप से महत्वपूर्ण” बताते हुए खरीदने की इच्छा जताई थी. अब 2026 में सत्ता में लौटते ही उन्होंने फिर वही मांग दोहराई है. ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन आता है और डेनमार्क ने इसे बेचने से साफ इनकार कर दिया है. ट्रंप प्रशासन दबाव बनाने के लिए पहले ही ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों पर 10% टैरिफ लगा चुका है. इस खबर के बाद से वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट और अस्थिरता देखी जा रही है.
