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बेटे की मौत की रिपोर्ट करवाने गए पिता को पुलिस ने कहा, पैसे लेकर आओ तब लिखेंगे एफआईआर

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी गाजियाबाद पुलिस का एक और कारनामा सामने आया है। भोजपुर और लोनी बॉर्डर के बाद अब विजयनगर पुलिस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। इस बार पुलिस ने इंसानियत को शर्मसार करते हुए सड़क हादसे में बेटे की मौत की रिपोर्ट लिखाने गए पिता से ही रिश्वत मांग ली। थाने में शिकायत के बाद कोई सुनवाई न होने पर पीड़ित ने एसएसपी से गुहार लगाई, जिसके बाद रिपोर्ट दर्ज हो सकी। पीड़ित की शिकायत के आधार पर एसएसपी ने मामले की जांच का आदेश दिया है।

नगर कोतवाली के बालूपुरा मोहल्ले में रहने वाले राकेश कश्यप का कहना है कि वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार की आजीविका चलाते हैं। गत 28 मई को उनका 25 वर्षीय बेटा उमेश हाईवे स्थित कृष्णा इंटर कॉलेज के सामने ट्रक की चपेट में आ गया था।

हादसे में उसकी मौत हो गई थी।

राकेश का आरोप है कि हादसे की सूचना पर बाईपास चौकी पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। हादसे में बेटे को गंवाने के बाद उन्होंने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई थी। राकेश कश्यप का आरोप है कि बाईपास चौकी इंचार्ज राजकुमार ने रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय कहा कि बेटा तो मर गया है। रिपोर्ट के चक्कर में मत पड़ो। चुपचाप बेटे की बाइक व मोबाइल ले जाओ।

एसएसआई ने कहा- पैसे लेकर आ जाओ रिपोर्ट लिखवा दूंगा
पीड़ित राकेश का कहना है कि इसके बाद रात के वक्त वह विजयनगर थाने के पास वह एसएसआई अनिल यादव से मिले। उस वक्त एसएसआई सफेद रंग की स्विफ्ट डियाजर कार में थे। उन्होंने उनसे भी रिपोर्ट दर्ज करने की गुहार लगाई। आरोप है कि एसएसआई ने कहा कि पैसे लेकर आ जाओ, रिपोर्ट लिखवा दूंगा। पीड़ित के मुताबिक थोड़ी देर बाद ही विजयनगर एसएचओ सरकारी गाड़ी में आते दिखाई दिए तो उन्होंने उन्हें रोककर सारा घटनाक्रम बताया। आरोप है कि एसएचओ ने भी एसएसआई की बात को सही ठहराया।

आत्महत्या की धमकी देने पर दर्ज हुई रिपोर्ट राकेश ने गत एक जून को एसएसपी कार्यालय में शिकायत देकर कार्रवाई की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि अगर उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर लेंगे। इसके बाद एसएसपी ने विजयनगर पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। एसएसपी के आदेश पर विजयनगर पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ केस दर्ज किया था।

रिपोर्ट लिखने में भी खेल कर गई पुलिस
कानूनविदों के मुताबिक एफआईआर दर्ज करते वक्त तहरीर के मजमून के आधार पर धाराएं लगाई जाती हैं। साथ ही, तहरीर में जिन लोगों पर आरोप होता है, उन्हें भी मुकदमे में आरोपी बनाया जाता है। लेकिन, विजयनगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में भी खेल कर दिया। तहरीर में लिखा होने के बावजूद रिश्वत मांगने वाले संवेदनहीनता दिखाने वाले चौकी इंचार्ज और रिश्वत मांगने वाले एसएसआई को आरोपी नहीं बनाया।

पुलिस ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
विजयनगर पुलिस ने राकेश के आरोपों को निराधार बताया है। एसएचओ महावीर सिंह का कहना है कि पीड़ित रिपोर्ट लिखाने थाने नहीं आया था। उसने पूर्व में कुछ और तहरीर दी थी, जो किसी के प्रभाव में आकर बदल दी। पीड़ित की तहरीर और वीडियो रिकॉर्डिंग में अलग-अलग बयान हैं। एसएसआई द्वारा कोई रिश्वत नहीं मांगी गई। पीड़ित की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पुलिसकर्मियों पर लगाए आरोपों की सत्यता की जांच कराई जा रही है। अगर जांच में कोई पुलिसकर्मी दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- अमित पाठक, एसएसपी

भोजपुर व लोनी बॉर्डर एसएचो हो चुके हैं सस्पेंड
हाल ही में भोजपुर पुलिस द्वारा गोकशी के आरोपी को रिश्वत लेकर जेल भेजने का मामला सामने आया था। जिसके बाद एसएसपी ने भोजपुर थाने के तत्कालीन एसएचओ प्रदीप कुमार और एसएसआई शकील अहमत को सस्पेंड कर उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसके अलावा अवैध असलहा के साथ पकड़े युवकों को डेढ़ लाख रुपये लेकर छोड़ने के मामले में लोनी बॉर्डर एसएचओ विश्वजीत सिंह व सिपाही अरविंद कुमार को सस्पेंड किया था।


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