गाजियाबाद के मुरादनगर में रविवार दोपहर को लोग फल विक्रेता जयराम के अंतिम संस्कार में शामिल होने श्मशान घाट पहुंचे थे। अंतिम संस्कार के दौरान बारिश हो रही थी। बारिश से बचने के लिए लोग वहां बने शेड में खड़े हो गए। तभी अचानक पूरी इमारत ढह गई और 18 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 38 लोग घायल हुए। मारे गए लोगों में फल विक्रेता के परिवार का एक सदस्य भी शामिल है। चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के बाद का मंजर बेहद भयावह था। मलबे में दबे लोगों के शरीर के अंग कट गए थे।

बारिश में नई गैलरी की छत गिरी
फल विक्रेता जयराम के पोते देवेंद्र ने बताया- दादा का अंतिम संस्कार चल रहा था। बारिश हो रही थी, तो लोग नई बनी गैलरी में खड़े हुए थे। अचानक तेज आवाज आई। जब मैं उस तरफ दौड़ा तो देखा कि छत गिर चुकी थी। कई लोग इसके नीचे दबे हुए थे। इस हादसे में मेरे चाचा की मौत हो गई। बड़े चाचा का लड़का मलबे में दबा था। उसे अस्पताल में भर्ती करवाया है। मेरे पिता को कंधे पर चोट आई है। वे हादसे में बाल-बाल बच गए।

जो जहां खड़ा था, वहीं दबा रहा गया
स्थानीय निवासी सुशील कुमार ने बताया कि मलबे के नीचे दबे लोगों की हालत देखकर हर किसी के रौंगटे खड़े हो गए। मलबे में किसी का केवल हाथ नजर आ रहा था तो किसी का सिर। हालात देखकर ऐसा लग रहा था कि जो जहां खड़ा था, वहीं दब गया। गैलरी में किनारे पर खड़े लोग भी इस हादसे का शिकार हुए।

चीख-पुकार सुनकर लोग श्मशान की तरफ भागे
श्मशान घाट के पास रहने वाले अरनेस्ट जेम्स ने बताया कि बारिश हो रही थी। लोग अपने घरों में थे। अचानक तेज आवाज हुई और चीख पुकार मच गई। शुरू में कोई समझ नहीं पाया कि आखिर हुआ क्या है? चीख पुकार तेज हुई, तो लोग घरों से बाहर निकले। उस समय कुछ लोग शोर मचाते हुए श्मशान से बाहर की तरफ भाग रहे हैं। जब स्थानीय लोग वहां पहुंचे, तो उनकी सांसें थम-सी गई। इसके बाद पुलिस और रेस्क्यू टीम ने मलबे में दबे लोगों को निकाला।

दबने से कुछ लोगों के हाथ-पैर कट चुके थे
श्मशान के पड़ोस में रहने वाले मोरगन का कहना है कि शुरू में जो स्थिति थी, उसे देखकर नहीं लग रहा था कि मलबे में दबे लोग जिंदा होंगे। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को बचाव का मौका नहीं मिला। कुछ ऐसे भी लोग थे जिनके हाथ-पैर कट चुके थे। पुलिस और रेस्क्यू टीम ने जेसीबी बुलाकर मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया।

महिलाएं भी रोते-बिलखते श्मशान पहुंचीं
इस हादसे का शिकार हुए लोगों के परिजन भी मौके पर पहुंचे गए। सभी का रो-रोकर बुरा हाल था। कोई मलबे में अपने भाई की तलाश कर रहा था, तो कोई अपने पिता की। महिलाएं भी रोती-बिलखती अपनों को खोज रही थीं। एक दूसरे से लोग पूछ रहे थे कि कौन कहां है, किसी का कुछ पता चला। शुरू में किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। हर किसी की जुबां से यही निकल रहा था कि यह क्या हो गया?

60 फीट लंबी बिल्डिंग ढाई महीने पहले बनी थी
बताया जा रहा है कि ढाई महीने पहले श्मशान घाट पर धूप, बारिश से बचाव के लिए गैलरी बनाई गई थी। इसी लंबाई करीब 60 फीट थी। लेकिन, इसे बनाते समय क्वालिटी का ध्यान नहीं रखा गया। गैलरी के गिरते ही इसे बनाने में इस्तेमाल हुई सामग्री चूरे में तब्दील हो गई।

100 से ज्यादा लोग अंतिम संस्कार में पहुंचे थे
मुरादनगर के श्मशान में हादसे के समय 100 से ज्यादा लोग गैलरी की छत के नीचे खड़े हुए थे। ये सभी फल व्यापारी के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मरने वालों के परिजन को दो-दो लाख रुपए की मदद देने के निर्देश दिए हैं। साथ हीमेरठ कमिश्नर और एडीजी रिपोर्ट मांगी है।

By RIGHT NEWS INDIA

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