Washington News: अमेरिका ने इजरायल और हमास के बीच जारी खूनी संघर्ष को रोकने के लिए एक बड़ा ‘मास्टरप्लान’ तैयार किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ के दूसरे चरण का ऐलान कर दिया है। सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिका ने इस शांति मिशन में भारत को शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। ट्रंप प्रशासन का मकसद गाजा में स्थायी शांति लाना है। यह बोर्ड युद्धविराम के ढांचे को मजबूत करेगा। ट्रंप दुनिया के ताकतवर देशों को साथ लेकर मध्य पूर्व के इस संकट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं।
गाजा को फिर से बसाने की जिम्मेदारी
‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ केवल कागजों पर नहीं चलेगा। इसके पास जमीन पर काम करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। यह बोर्ड एक तकनीकी समिति के काम की निगरानी करेगा। यह समिति गाजा के रोजमर्रा के प्रशासन को संभालेगी। ट्रंप की योजना के मुताबिक, इस बोर्ड का मुख्य लक्ष्य गाजा में स्थिरता लाना है। युद्ध से बर्बाद हुए इलाकों का फिर से निर्माण किया जाएगा। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड जुटाया जाएगा। भारत की भागीदारी से यह सुनिश्चित होगा कि राहत और निर्माण का काम निष्पक्ष तरीके से हो।
एक अरब डॉलर और सदस्यता की शर्तें
अमेरिका ने भारत के अलावा चार अन्य प्रभावशाली देशों को भी इस मिशन में बुलाया है। इस बोर्ड का मेंबर बनने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। चार्टर के मुताबिक, अगर कोई देश ‘स्थायी सदस्यता’ चाहता है, तो उसे बड़ी कीमत चुकानी होगी। उसे पुनर्निर्माण कोष में 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। हालांकि, जो देश पैसा नहीं देना चाहते, उनके लिए तीन साल की सदस्यता का विकल्प है। इसमें कोई वित्तीय शर्त नहीं है। खास बात यह है कि पाकिस्तान को भी इसका न्योता मिला है। वहां के पीएम शहबाज शरीफ ने इसकी पुष्टि की है।
दुनिया में बजा भारत का डंका
अमेरिका का यह आमंत्रण वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद का सबूत है। यह प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक जीत को दर्शाता है। आज जब पूरी दुनिया युद्ध की आग में जल रही है, तब अमेरिका ने भारत पर भरोसा जताया है। यह साबित करता है कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बन चुका है। मिडिल ईस्ट में शांति के लिए भारत का आगे आना रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। इससे क्षेत्र में भारत के हित भी सुरक्षित रहेंगे। ट्रंप की इस पहल से अब गाजा में शांति की उम्मीद पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
