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‘अंधेरे से सत्ता तक’… RSS पर New York Times का वो लेख, जिसने भारत में मचा दिया बवाल!

New Delhi News: अमेरिका के मशहूर अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक बार फिर भारत विरोधी लेख प्रकाशित किया है। इस बार अखबार ने RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) को निशाना बनाया है। लेख का शीर्षक है- ‘फ्रॉम द शैडोज टू पावर’ यानी ‘अंधेरे से सत्ता तक’। इस लेख में RSS को एक रहस्यमयी और खतरनाक संगठन बताया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के इस दावे के बाद भारत में विदेशी मीडिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसे भारत विरोधी नैरेटिव का एक हिस्सा माना जा रहा है।

RSS को बताया ‘सीक्रेट सोसायटी’

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने लेख में RSS के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अखबार ने इसे ‘सीक्रेट इल्यूमिनाटी’ और साजिश रचने वाला गुट बताया है। लेख में दावा किया गया है कि RSS ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं में घुसपैठ कर ली है। इसे एक ‘धुर दक्षिणपंथी’ (Far-Right) संगठन करार दिया गया है। अखबार का कहना है कि यह संगठन भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को कमजोर कर रहा है। लेख की भाषा से साफ है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

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सांस्कृतिक संगठन या साजिशकर्ता?

विश्लेषकों का कहना है कि न्यूयॉर्क टाइम्स का यह लेख पत्रकारिता कम और पक्षकारिता ज्यादा लगता है। RSS कोई गुप्त संगठन नहीं है। पूरे भारत में रोज इसकी हजारों शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं। इसमें लाखों स्वयंसेवक शामिल होते हैं। यह एक सांस्कृतिक संगठन है जो राष्ट्रहित की बात करता है। अगर राष्ट्रप्रेमी लोग सरकारी संस्थाओं में काम कर रहे हैं, तो इसे ‘घुसपैठ’ नहीं कहा जा सकता। अखबार ने अपनी भारत विरोधी कुंठा को खबर की शक्ल देने की कोशिश की है।

आतंकवाद के समर्थकों पर चुप्पी क्यों?

हैरानी की बात है कि न्यूयॉर्क टाइम्स को अपने शहर की घटनाएं नहीं दिखतीं। न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी ने मेयर पद की शपथ ली है। उन्होंने अपना कानूनी सलाहकार रमजी कासेम को बनाया है। रमजी कासेम वही वकील हैं, जिन्होंने 9/11 आतंकी हमले के आरोपियों का बचाव किया था। अखबार को RSS कट्टरपंथी लगता है, लेकिन आतंकवाद के आरोपियों का साथ देने वाले ‘लिबरल’ नजर आते हैं। यह अखबार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

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गोलवलकर और हिटलर का आधा सच

लेख में RSS के पूर्व सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर की किताब का भी जिक्र है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि गोलवलकर हिटलर से प्रभावित थे। उन्होंने भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने की बात कही थी। यह एक आधा सच है। गोलवलकर ने किस संदर्भ में उदाहरण दिया था, उसकी पड़ताल नहीं की गई। आज भारत में किसी भी अल्पसंख्यक के अधिकार कम नहीं हुए हैं। अखबार ने झूठ और आधे सच को मिलाकर एक जहरीला नैरेटिव तैयार किया है।

फर्जी खबरों का इतिहास और गिरती साख

यह पहली बार नहीं है जब न्यूयॉर्क टाइम्स विवादों में आया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अखबार पर 15 बिलियन डॉलर का मानहानि का केस किया है। ट्रंप ने उन पर छवि खराब करने का आरोप लगाया है। साल 2003 में इसी अखबार के रिपोर्टर जेसन ब्लेयर पर फर्जी खबरें गढ़ने के आरोप सही साबित हुए थे। लगातार झूठी रिपोर्टिंग के कारण पिछले पांच सालों में न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रिंट सब्सक्रिप्शन में भारी गिरावट आई है।

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