हिमफेड द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे सेबों का पाया गया कम वजन, जानिए क्या है मामला

शिमला। Himachal Apple, हिमफेड की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमआइएस) के तहत खरीदे जा रहे सेब का कम भार पाया है। इस संबंध में अधिकारियों को पूरा तोल, गला-सड़ा व कम आकार का सेब न खरीदने का निर्देश दिया गया है।

इस संबंध में शिकायतें आ रही थी। सेब की खरीद को लेकर हिमफैड के अध्यक्ष गणेश दत्त ने ऊपरी शिमला में विभिन्न सेब एकत्रीकरण केंद्रोंं का औचक निरीक्षण किया। सेब की गुणवत्ता, नापतोल तथा सेब की मात्रा की जांच ठियोग, गुम्मा, खड़ापत्थर, गाजटा, अंटी, पुजारली-4, गुजांदली, क्षैणी, टिक्कर आदि केद्रों में की गई। इसमें उनके साथ अंटी-सावड़ा के स्थानीय निदेशक भीम सिंह झौटा भी साथ मौजूद रहे।

सभी केंद्र प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सड़ा गला तथा निर्धारित आकार से कम का सेब न खरीदें। कुछ स्थान पर सेब की बोरियों को तोलकर देखा गया और पाया कि किसी-किसी बोरी में निर्धारित 37.50 किलो से कम सेब था। इसके अलावा खाद के डिपो का भी निरीक्षण किया और गोदाम इंचार्ज को सभी प्रकार की खाद को अपने स्टाक में रखने का भी निर्देश दिया।

मंत्री के बयान से किसान-बागवान आहत : रोहित

ठियोग। उपमंडल ठियोग में पूर्व विधायक व कांग्रेस नेता रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब की कीमतों में भारी गिरावट के बाद प्रदेश सरकार के मंत्री जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं उससे किसान-बागवान बहुत आहत हो रहे हैं। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से सेब का तूड़ान रोकने वाला बयान हो या बागवानी मंत्री महेंद्र ठाकुर का खुले सेब मंडियों में लाने वाला बयान हो, सभी हास्यास्पद हैं। सेब जल्दी खराब होने वाला फल है इसे अधिक समय तक बगीचों में नहीं रख सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सेब आर्थिकी को लेकर बिल्कुल असंवेदनशील रवैया अपनाए हुए है जिस कारण इस साल सेब आर्थिकी के पांच हजार करोड़ के व्यवसाय में काफी कमी आने की संभावना बन गई है। सेब बागवानों का लागत मूल्य 25 से 30 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि इस साल बागवानों को दस साल पुराने दाम भी नहीं मिल रहे हैं। बी और सी ग्रेड का सेब तो बागवानों को लागत मूल्य से भी कम पर बेचना पड़ रहा है।

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