केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि भारतीय नागरिकों से विवाह होने के आधार पर ओसीआई कार्डधारकों के तौर पर पंजीकृत विदेशी नागरिकों को तलाक लेने के बाद यह लाभ नहीं मिल सकता है।

गृह मंत्रालय ने बेल्जियम के ब्रसेल्स में भारतीय दूतावास के निर्णय का बचाव करते हुए यह दलील दी, जिसने बेल्जियम की महिला को भारतीय व्यक्ति के साथ उसकी शादी समाप्त होने के बाद अपना ओसीआई कार्ड वापस करने का निर्देश दिया है। महिला ने नागरिकता कानून – धारा सात द (फ) के प्रावधान को चुनौती दी गई है, जिसके तहत किसी भारतीय नागरिक का विदेशी साथी (पति या पत्नी) तलाक होने पर भारत का विदेशी नागरिक (ओसीआई) होने का दर्जा खो देगा।

प्रावधान का बचाव करते हुए गृह मंत्रालय ने एक हलफनामे में कहा कि जिस धारा को चुनौती दी गई है वह समझने लायक अंतर (इंटेलिजेबल डिफरेंशिया) के आधार पर स्पष्ट वर्गीकरण करता है जो उन विदेशी नागरिकों पर लागू है जो भारत के नागरिक या ओसीआई कार्डधारक से शादी के आधार पर ओसीआई कार्डधारक के तौर पर पंजीकृत थे और जिनकी शादी बाद में समाप्त हो गई है।

गृह मंत्रालय ने केंद्र सरकार के स्थायी वकील अजय दिगपॉल के माध्यम से दायर अपने हलफनामे में कहा कि प्रावधान में ऐसे विदेशी नागरिकों के ओसीआई कार्डधारक को रद्द करने का प्रवाधान है क्योंकि वे नागरिकता कानून,1955 के तहत अब इसके लिए पात्र नहीं हैं।

मंत्रालय ने कहा कि महिला को एक भारतीय नागरिक से विवाह करने के कारण बेल्जियम के ब्रसेल्स में स्थित भारतीय दूतावास द्वारा भारतीय मूल का व्यक्ति (पीओआई) कार्ड 21 अगस्त, 2006 को जारी किया गया था। मंत्रालय ने कहा कि उसने अक्टूबर 2011 में अपने पति को तलाक दे दिया था और बाद में उसे इस शादी के आधार पर जारी पीआईओ कार्ड को रद्द कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन उस वक्त यह नहीं किया गया था।

गृह मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि महिला का ओसीआई दर्जा अब भी रद्द नहीं हुआ है और उसे बस कार्ड वापस करने को कहा गया है। 

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