सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद एम्स में शुरू हुई हरीश की ‘इच्छामृत्यु’, 13 साल के दर्द का होगा अंत

Delhi News: 13 साल से कोमा जैसी स्थिति में पड़े हरीश राणा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत की मंजूरी के बाद दिल्ली एम्स में उनकी पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह भारत में अदालत की अनुमति से इच्छामृत्यु का पहला मामला माना जा रहा है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम अब इस पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रही है।

एम्स में बनी 5 डॉक्टरों की विशेष टीम

सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद एम्स प्रबंधन ने हरीश राणा को अस्पताल में भर्ती कर लिया है। उनकी गरिमामयी मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए पांच वरिष्ठ डॉक्टरों का एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया है। इस टीम में पैलिएटिव केयर, एनेस्थिसिया और न्यूरोलॉजी जैसे विभागों के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम मरीज की हर पल निगरानी कर रही है और कोर्ट के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कर रही है।

प्रक्रिया पूरी होने में क्यों लग रहा है समय?

कोर्ट की अनुमति के बावजूद इस प्रक्रिया को तुरंत लागू नहीं किया जा सकता है। हर मामले में मरीज की स्थिति का गहन आकलन करना बेहद जरूरी होता है। हरीश फिलहाल किसी लाइफ सपोर्ट सिस्टम या वेंटिलेटर पर नहीं हैं। उन्हें केवल एक नली के जरिए सामान्य पोषण दिया जा रहा है। परिवार ने यह भी तय किया है कि तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कोई वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया जाएगा।

13 साल पहले हुआ था दर्दनाक हादसा

हरीश राणा को 13 साल पहले सिर में काफी गंभीर चोट लगी थी। इस हादसे के बाद से वह आज तक होश में नहीं आ सके हैं। उनका दिमाग पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका है। वह केवल स्वाभाविक रूप से सांस ले पा रहे हैं। लंबे समय से एक ही स्थिति में बिस्तर पर रहने के कारण उन्हें अब बेडसोर, कफ और निमोनिया जैसी कई गंभीर समस्याएं भी हो गई हैं।

भारत में क्या हैं इच्छामृत्यु के कानूनी नियम?

भारत में किसी को इंजेक्शन देकर जान लेना पूरी तरह से गैरकानूनी है। इसे एक्टिव यूथेनेशिया कहा जाता है और इसके दुरुपयोग का खतरा रहता है। भारत में चर्चित अरुणा शानबाग मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केवल पैसिव यूथेनेशिया को ही मंजूरी दी थी। इसमें मरीज का कृत्रिम पोषण और लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटा लिया जाता है। पोषण बंद करने के बाद भी मरीज की मृत्यु होने में 15 दिन या उससे अधिक का समय लग सकता है।

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