पर्यटकों का हुजूम,पांच सौ मीटर पर जमी चार इंच मोटी बर्फ

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बड़ा देव कमरूनाग की सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक झील जाम हो गई है। करीब पांच सौ मीटर गोलाकार क्षेत्र में घने कोहरे की चादर ओढ़ चुकी यह झील अब शीशे का रूप धारण कर चुकी है। सर्दियों के हर मौसम में भले ही हर साल यह जाम होती रही है, लेकिन इस बार पानी से लबालब इस झील ने पहली बार करीब चार ईंच घने कोहरे की चादर ओढ़ रखी है। इतनी भरकम ठंड होने के बावजूद यहां श्रद्धालुओं व पर्यटकों के आने-जाने का तांता लगा हुआ है। बता दें कि देवता कमेटी ने स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए फरमान को लेकर अब यहां के कपाट पूर्णतयः बंद कर दिए हैं, लेकिन उसके बावजूद कुछ लोग नियमों को ठेंगा दिखाकर और जान जोखिम डालकर यहां का रुख कर रहे हैं।

सनद रहे कि कुछ वर्ष पूर्व यहां शरारती तत्त्वों ने इसी ही मौसम के दौरान इस झील में जमे घने कोहरे को कुल्हाडि़यों के साथ तोड़कर इसमें श्रद्धालुओं द्वारा मन्नतें पूर्ण होने पर चढ़ाई गई करोड़ों की नकदी सहित सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ फेरने का प्रयास किया था, लेकिन देवता कमेटी द्वारा किए गए प्रयासों के आगे डकैतों की एक नहीं चली। लिहाजा उस घटना से सबक सीखकर कमेटी ने इस बार समय पर ही झील को सुरक्षित रखने के प्रबंध कर लिए हैं। देवता कमेटी के कारिंदे आजकल झील को कड़ी सुरक्षा प्रदान करने हेतु पूरी तरह मुस्तैद हैं। श्रीदेव कमरूनाग के कटवाल भीष्म ठाकुर व करिंदे हंसराज ठाकुर नें खबर की पुष्टि की है।

लोगों से अपील, न आएं

कमरूनाग के कटवाल भीष्म ठाकुर ने लोगों से अपील की है कि वे मंदिर की ओर आने का जोखिम न उठाएं। देवता कमेटी ने अब यहां निर्मित सभी सरायं व अन्य ठहरने के कमरे पूर्णतयः बंद कर दिए हैं। इतना ही नहीं, अब कपाट बंद किए जाने के बाद यहां के सभी ढाबे पूर्ण रूप से बंद पड़े हैं।


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